Mango Man: एक पेड़, 14 तरह के आम! गुजरात के किसान का कमाल देखकर हर कोई हैरान

Mango Man: एक पेड़, 14 तरह के आम! गुजरात के किसान का कमाल देखकर हर कोई हैरान

गुजरात के अमरेली जिले के एक किसान ने एक ही आम के पेड़ पर 14 तरह के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है. ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से उगाए गए इन आमों में कई पुरानी और खास किस्में शामिल हैं. किसान उकाभाई भट्टी की यह अनोखी खेती अब लोगों और दूसरे किसानों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बन गई है.

एक पेड़ पर लगा आमों का मेलाएक पेड़ पर लगा आमों का मेला
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 19, 2026,
  • Updated May 19, 2026, 12:54 PM IST

आम को फलों का राजा कहा जाता है. गर्मी का मौसम आते ही हर कोई मीठे और रसदार आम खाने का इंतजार करता है. कोई केसर आम पसंद करता है, तो किसी को लंगड़ा, दशहरी या हाफुस आम अच्छा लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही पेड़ पर कई तरह के आम उग सकते हैं? शायद नहीं. लेकिन गुजरात के एक किसान ने ऐसा कर दिखाया है. उन्होंने एक ही आम के पेड़ पर 14 तरह के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है.

गुजरात के छोटे से गांव में बड़ा कमाल

यह अनोखा आम का पेड़ गुजरात के अमरेली जिले के धारी तालुका के डितला गांव में है. यहां रहने वाले किसान उकाभाई भट्टी अपने नए और अलग तरीके की खेती के लिए पूरे इलाके में मशहूर हैं. उकाभाई कई तरह की खेती करते हैं और उन्हें एक प्रोग्रेसिव किसान माना जाता है.

उनके घर के आंगन में लगा आम का पेड़ आज लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस एक पेड़ पर अलग-अलग स्वाद और रंग के 14 तरह के आम उग रहे हैं. गांव के लोग जब इस पेड़ को देखते हैं, तो हैरान रह जाते हैं. दूर-दूर से किसान और लोग इस पेड़ को देखने आते हैं.

कैसे उगाए एक पेड़ पर इतने आम?

उकाभाई भट्टी ने यह कमाल “ग्राफ्टिंग” तकनीक से किया है. ग्राफ्टिंग का मतलब होता है एक पेड़ की टहनी को दूसरे पेड़ में जोड़ना. उन्होंने देसी आम के पेड़ पर अलग-अलग आम की टहनियां लगाईं. धीरे-धीरे उन टहनियों पर अलग-अलग किस्म के आम आने लगे.

इस पेड़ पर आम्रपाली, नीलम, दशहरी, बेगम और कई दूसरी किस्मों के आम लगते हैं. कुछ आम ऐसे भी हैं जिनके नाम बहुत कम लोगों ने सुने होंगे. हर आम का स्वाद अलग है और हर आम देखने में भी अलग लगता है.

महाराष्ट्र से मिला नया आइडिया

उकाभाई भट्टी को यह अनोखा काम करने का विचार तब आया जब वह महाराष्ट्र गए थे. वहां उन्होंने अलग तरह की खेती देखी. इसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ नया किया जाए. फिर उन्होंने अलग-अलग जगहों से आम की किस्में ढूंढनी शुरू कीं.

उन्होंने मेहनत करके पुराने और खास आमों की टहनियां इकट्ठा कीं और उन्हें अपने पेड़ पर लगाया. कई साल की मेहनत के बाद आज उनके पेड़ पर 14 तरह के आम उग रहे हैं.

पुराने आमों को बचाने की कोशिश

उकाभाई बताते हैं कि पहले नवाबों के समय में 200 से ज्यादा तरह के आम हुआ करते थे. उस समय नारियल, गुलाब, अनार, सिंदूरी, काला जमादार, सौंफ, सरदार, पायलट और अषाढ़िया जैसे कई खास आम मिलते थे. लेकिन धीरे-धीरे ये पुरानी किस्में खत्म होती चली गईं.

आज ज्यादातर लोग केवल केसर, दशहरी या हाफुस आम के बारे में ही जानते हैं. नई पीढ़ी पुराने आमों के नाम तक नहीं जानती. इसलिए उकाभाई ने इन खास आमों को बचाने का फैसला किया. उन्होंने इन आमों को अपने पेड़ पर एक “एल्बम” की तरह संभाल कर रखा है.

लोग दूर-दूर से देखने आते हैं यह पेड़

अब यह पेड़ पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है. किसान, छात्र और खेती सीखने वाले लोग दूर-दूर से यहां आते हैं. कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर एक ही पेड़ पर इतने अलग-अलग आम कैसे उग सकते हैं.

जब पेड़ पर छोटे-छोटे आम लगते हैं, तो देखने में बहुत सुंदर लगते हैं. फिर जैसे-जैसे आम पकते हैं, पेड़ रंग-बिरंगे आमों से भर जाता है. हर आम का स्वाद अलग होता है. कोई मीठा होता है, तो कोई खुशबूदार.

नेचुरल खेती की ओर बढ़ रहे किसान

उकाभाई भट्टी ने बताया कि अब किसान धीरे-धीरे नेचुरल फार्मिंग यानी प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. लोग अब ऐसी खेती करना चाहते हैं जिससे मिट्टी खराब न हो और फसल भी अच्छी हो.

उकाभाई की मेहनत आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. उन्होंने दिखा दिया कि अगर किसान कुछ नया सोचें और मेहनत करें, तो खेती में भी चमत्कार हो सकता है. उनका यह आम का पेड़ केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि खेती की दुनिया का एक अनोखा उदाहरण बन गया है.

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