असम में आलू किसानों की बढ़ी चिंता: दूसरे राज्यों से आयात से गिर रहे दाम, बोकाखाट में विरोध तेज

असम में आलू किसानों की बढ़ी चिंता: दूसरे राज्यों से आयात से गिर रहे दाम, बोकाखाट में विरोध तेज

असम में आलू की कीमतों में गिरावट से किसान परेशान हैं. सादिया के बाद बोकाखाट के किसानों ने दूसरे राज्यों से आयात पर रोक और सही दाम की मांग उठाई है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 09, 2026,
  • Updated Jan 09, 2026, 7:37 PM IST

असम में किसान आलू की कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं. इसे लेकर सादिया में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जहां किसानों ने राज्य के बाहर से आलू के लगातार आयात के कारण होने वाले नुकसान के खिलाफ प्रदर्शन किया है. अब असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा के निर्वाचन क्षेत्र बोकाखाट के किसान भी इसी तरह की चिंताएं जता रहे हैं. किसानों का कहना है कि उनकी उपज का सही दाम इसलिए नहीं मिल रहा है क्योंकि दूसरे राज्यों से आलू मंगाया जा रहा है. इससे मार्केट में आलू के रेट में गिरावट आ रही है.

बोकाखाट के किसानों का कहना है कि उन्हें डर है कि उन्हें भी सादिया जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ेगा. इस इलाके के कई किसानों ने इस मौसम में आलू की खेती में बहुत पैसा लगाया है, और बीज आलू और अन्य चीजें ऊंची कीमतों पर खरीदी हैं. आरोप लगाए गए हैं कि कृषि विभाग से किसानों को कम मदद मिल रही है. आरोप तो यह भी है कि कुछ किसानों को खाद और बीज सरकार के बजाय नुमालीगढ़ रिफाइनरी के सोशल डेवलपमेंट फंड से मिले हैं.

लोन के बोझ से दबे किसान

उन किसानों में चिंताएं खास तौर पर ज्यादा हैं जिन्होंने आलू उत्पादन के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थानों और अन्य स्रोतों से लोन लिया है. बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों को डर है कि अगर दूसरे राज्यों से आयात बिना रोक-टोक जारी रहा तो बाजार कीमतें फिर से उत्पादन लागत से नीचे गिर सकती हैं.

बोकाखाट के नुमालीगढ़ के कई हिस्सों में, जिसमें धोडांग, कुरुवाबाहि, बोराइखुआ और जोगनिया शामिल हैं, किसानों ने 1,500 बीघा से ज्यादा जमीन पर आलू लगाए हैं. ज्यादातर किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और फसल की चीजें खुद ही और ऊंची कीमतों पर खरीदी हैं.

किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू

कुरुवाबाहि-जोगनिया गांव के एक किसान मंटू सैकिया ने 'सेंटिनेल' से कहा कि स्थानीय किसान सादिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं. "एक किसान के तौर पर, मैं सादिया के किसानों के विरोध का समर्थन करता हूं. पिछले कुछ सालों में, सरकार का नारा 'हमारा खेत, हमारा बाजार' असल में लागू नहीं हुआ है. हममें से ज्यादातर किसानों ने बीज आलू 60-70 रुपये से ज्यादा की कीमतों पर खरीदे हैं.''

किसानों का बर्बाद होना तय

किसान मंटू सैकिया ने कहा, विडंबना यह है कि जिस कृषि मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में विकसित अर्थव्यवस्था की बात जोर-शोर से की जाती है, वहां किसानों की हालत बहुत खराब है. पहले भी, हमें सही कीमतें न मिलने के कारण क्विंटल आलू फेंकने पड़े थे, और हमें कोई मुआवजा भी नहीं मिला था. अगर इस बार भी कृषि मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के किसानों को सादिया जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा, तो किसानों का बर्बाद होना तय है.

आलू का आयात रोकने की मांग

सैकिया ने सरकार से राज्य के बाहर से आलू का आयात रोकने और स्थानीय रूप से उगाए गए आलू के लिए सही कीमतें सुनिश्चित करने की अपील की. ​​उन्होंने बोकाखाट के किसानों से भी सामूहिक रूप से संगठित होने का आग्रह किया. चिनाकान गांव के किसानों ने भी इसी तरह की चिंताएं बताई हैं, जो 2025 में तीन बाढ़ से प्रभावित हुआ था. धान की खेती प्रभावित होने के कारण, इस इलाके के किसानों ने इस मौसम में आलू, कद्दू और सरसों की खेती शुरू कर दी है. दूसरे जगहों के किसानों की तरह, उन्होंने भी बीज खरीदने के लिए खुद ही पैसे लगाए और उनका कहना है कि आलू की कम कीमतों से उन्हें काफी नुकसान होगा.

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