
पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से बारिश न होने, सूखी ठंड की लहरों और लगातार पाला गिरने से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के किसान गहरे संकट में घिर चुके हैं. कड़ाके की ठंड ने न केवल हवा को चुभन भरी बना दिया है, बल्कि खेतों की हरियाली को भी खत्म कर दिया है. जिन खेतों में सब्जियां और अन्य फसलें लहलहाने की उम्मीद थी, वहां अब सूखी, झुलसी फसलें ही नजर आ रही हैं. किसानों ने बमुश्किल बीज जुटाकर और कड़ी मेहनत से सब्जी और अन्य फसलें बोई थीं, लेकिन मौसम की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. पाले की मार से पौधे झुलस गए हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है.
इससे पहले पहाड़ के किसान जंगली जानवरों जैसे बंदरों, लंगूरों और जंगली सूअरों से अपनी फसलों की रक्षा के लिए जद्दोजहद कर रहे थे, अब ठंड की दोहरी मार ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. रातों की सर्द हवाओं ने मिट्टी को जमाकर बीजों के अंकुरण को रोक दिया है, जबकि दिन की धूप भी अपर्याप्त साबित हो रही है. ऐसे में किसान सरकार से राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी आजीविका को सहारा मिल सके.
महिला किसान सविता देवी ने बताया कि उन्होंने जंगली जानवरों के खेतों में आने और फसलों को नुकसान से परेशान हैं. इन्हीं परेशानी की वजह से उन्होंने इस साल अपने खेत में गेहूं की जगह मसुर की फसल उगाई ताकि बंदर या जंगली जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सकें, लेकिन लंबे समय से बारिश न होने और सूखी ठंड की वजह से इस बार मसूर का फसल भी बर्बाद हो रहा है.
एक दूसरे किसान परु सिंह ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर मसूर और गेहूं की फसल बोई थी, लेकिन बारिश न होने और सूखी ठंड होने की वजह से फसलें पीली पड़ रही हैं. उन्होंने बताया कि बारिश ना होने की वजह से जिले के सभी किसान परेशान हैं. उन्होंने कहा कि बहुत मुश्किल और मेहनत से किसानों ने फसलों को उगाया है, लेकिन इस बार घाटा लगने का खतरा मंडरा रहा है.
वहीं, लंबे समय से पहाड़ के लोगों को बारिश और बर्फबारी का इंतजार है. ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम विभाग ने बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया था, लेकिन बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है. बता दें कि पिछले वर्ष तक इन घाटियों में जबरदस्त बर्फबारी होने की वजह से चारों तरफ बर्फ ही बर्फ दिखाई देती थी. लेकिन इस वर्ष अभी तक बर्फबारी कम ही हुई है, जिससे किसान परेशान हैं. (जगदीश चंद्र पांडे की रिपोर्ट)