
पंजाब की अनाज मंडियों में सुस्त पड़ी गेहूं खरीद ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है. केंद्र सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों में दी गई राहत के बाद सिर्फ पांच दिनों में खरीद के आंकड़ों में कई गुना उछाल दर्ज किया गया है, जिससे मंडियों में रुकी प्रक्रिया दोबारा पटरी पर लौटती दिख रही है. सांसद सतनाम सिंह संधू ने मंगलवार को मोहाली जिले के डेरा बस्सी अनाज मंडी का दौरा कर हालात का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने खरीद, उठान, भुगतान और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की. किसानों से सीधे बातचीत कर यह भी जाना कि फसल बेचने में उन्हें किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आ रही है. इस पर किसानों ने बताया कि हाल के दिनों में खरीद की रफ्तार बढ़ी है और प्रक्रिया पहले से अधिक सुचारु हुई है.
सांसद सतनाम सिंह संधू इससे पहले समराला मंडी भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने आढ़ती एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और किसानों के साथ बैठक कर खरीद व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने मंडियों में शुरुआती दौर में आई सुस्ती को लेकर फीडबैक लिया गया और सुधार के बाद की स्थिति को भी समझा.
दरअसल, पंजाब में इस बार गेहूं खरीद की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. 15 अप्रैल तक राज्य में 6.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज हुई थी, लेकिन खरीद महज 2.47 लाख मीट्रिक टन तक सीमित रही. इससे किसानों में चिंता बढ़ने लगी थी, खासकर उन किसानों के बीच जिनकी फसल मौसम की मार झेल चुकी थी.
स्थिति को देखते हुए 17 अप्रैल को केंद्र सरकार ने गुणवत्ता मानकों में ढील देने का फैसला किया. यह निर्णय उस बैठक के बाद लिया गया, जिसमें सांसद सतनाम सिंह संधू, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने किसानों की समस्याएं रखी गई थीं. प्रतिनिधिमंडल ने बताया था कि बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे बड़ी मात्रा में फसल खरीद मानकों से बाहर हो रही है.
इसके बाद केंद्र की ओर से लिए गए इस फैसले का असर यह हुआ कि 20 अप्रैल तक राज्य में 38.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई, जिसमें से 34.16 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है. यानी पांच दिनों के भीतर ही खरीद व्यवस्था ने रफ्तार पकड़ ली और मंडियों में लंबित फसल तेजी से उठने लगी.
मार्च और अप्रैल में हुई बारिश के कारण गेहूं के दानों की चमक और गुणवत्ता प्रभावित हुई थी. ऐसे में सरकार ने लस्टर लॉस और सिकुड़े दानों की सीमा में ढील दी, जिससे प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ गई. इस कदम से किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से राहत मिली और सरकारी खरीद में तेजी आई. वहीं, मंडी स्तर पर भी व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिला है. उठान और भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे किसानों का भरोसा बढ़ा है. (एएनआई)