
आज के समय में कई लोग कहते हैं कि खेती में फायदा नहीं है. लेकिन महाराष्ट्र के बीड जिले के देवला गांव के किसान रवींद्र देवरवाडे ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है. उन्होंने बहुत कम जमीन में खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया और एक नई मिसाल पेश की है. रवींद्र देवरवाडे के पास केवल 30 गुंठे (लगभग पौन एकड़) जमीन है. उन्होंने इस छोटी सी जमीन में गन्ने की खेती की, लेकिन सिर्फ एक फसल पर निर्भर नहीं रहे. उन्होंने गन्ने के साथ-साथ लहसुन, प्याज और आलू की भी खेती की. इसे अंतर-फसल (Intercropping) कहते हैं.
देवरवाडे ने अपनी खेती में नई तकनीक अपनाई. उन्होंने मिट्टी को मजबूत बनाने के लिए बायोचार, बायोमिक्स और प्रोम जैसे खादों का उपयोग किया. इससे जमीन की ताकत बढ़ी और फसल अच्छी हुई. सबसे अच्छी बात यह रही कि एक ही बार खाद और पानी देने से सभी फसलें तैयार हो गईं, जिससे खर्च कम हो गया.
इस खेती से उन्हें अच्छा उत्पादन मिला. उन्होंने 300 किलो लहसुन, 1500 किलो प्याज और 6 टन आलू पैदा किया. साथ ही, उनके खेत में लगभग 40 टन गन्ना तैयार होने की उम्मीद है. यह सब केवल 30 गुंठे जमीन में हुआ, जो अपने आप में एक बड़ी बात है.
जब बाजार में आलू के दाम बहुत कम हो गए, तब देवरवाडे ने हार नहीं मानी. उन्होंने 3 टन आलू बेच दिए, लेकिन बाकी आलू से खुद चिप्स बनाए.
जो आलू बाजार में सस्ते बिक रहे थे, वही चिप्स बनाकर 200 से 250 रुपये प्रति किलो बिकने लगे. इस तरह उन्होंने अपने नुकसान को मुनाफे में बदल दिया. इसे ही वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) कहा जाता है.
सभी खर्च निकालने के बाद भी देवरवाडे को केवल अंतर-फसलों से ही 50 से 60 हजार रुपये की कमाई हुई. अभी गन्ना बेचना बाकी है, जिससे उन्हें और ज्यादा फायदा होगा.
रवींद्र देवरवाडे की कहानी हमें सिखाती है कि अगर किसान सही तरीके से योजना बनाएं और नई तकनीक अपनाएं, तो कम जमीन में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. अगर फसल को बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण (Processing) किया जाए, तो मुनाफा और बढ़ सकता है. उनका यह तरीका आज कई किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है और पूरे इलाके में उनकी सराहना हो रही है.
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