
पंजाब में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है. प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुककर हो रही बारिश और मानसा इलाके में ओलावृष्टि के बाद धान की फसल को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है. संगरूर में शाम के समय अचानक तेज बारिश ने कटाई और मंडियों में रखी फसल की संभाल दोनों को प्रभावित किया है. संगरूर के भुल्लरहेड़ी गांव की मंडी में किसानों का धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ था. बारिश शुरू होते ही किसान अपनी फसल बचाने के लिए भागदौड़ करने लगे और जल्दबाजी में धान को तिरपाल से ढकने का प्रयास किया. किसानों का आरोप है कि मंडियों में फसल को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए.
नमोला गांव के किसान अरमाला सिंह ने बताया कि बारिश से हुए नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल है. उन्होंने कहा, "नुकसान बहुत ज्यादा है. यह तो कुदरत का कहर है. कम से कम दो-दो, तीन-तीन इंच पानी भरा है- मंडी में भी और खेतों में भी." उन्होंने कहा कि अभी तक कटाई भी 80 प्रतिशत से कम हुई है, सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत फसल ही कटकर मंडी तक पहुंच पाई है, बाकी पकी हुई फसल खेतों में खड़ी है, जिस पर भी बारिश का खतरा मंडरा रहा है.
किसानों की चिंता इस बात को लेकर और बढ़ गई है कि बारिश से धान में नमी बढ़ जाएगी. किसान का कहना है कि एक बार फसल गीली हो गई तो खरीद एजेंसियां भी नाक-मुंह बनाकर खरीदती हैं, जिससे उन्हें भाव नहीं मिलता और नुकसान दोहरा हो जाता है. इससे फसल को सुखाने और सरकारी खरीद की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
धान की खरीद भी इस बार देरी से शुरू हुई है. किसानों के मुताबिक, खरीद का काम 17-18 अक्टूबर के बाद ही पटरी पर आया है और पहली खरीद बहुत कम हो रही है. ऐसे में 18 अक्टूबर के बाद खेतों में खड़ी फसल की कटाई लगातार बारिश के चलते प्रभावित हो रही है. किसानों का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह खराब बना रहा तो कटाई और मंडियों में खरीद का काम दो से तीन दिन तक बाधित रह सकता है.
अरमाल सिंह बताते हैं कि किसान छह महीने की मेहनत से फसल तैयार करता है और इसी कमाई से अगली फसल की बुवाई, खाद-बीज का खर्च, बच्चों की पढ़ाई-फीस और घर की शादी-ब्याह जैसी जरूरतें पूरी करता है. उन्होंने कहा, "किसान के पास कोई चारा नहीं होता. हर काम इसी फसल पर निर्भर है. अब बस सरकार से ही आस है कि थोड़ी राहत दे दे, ताकि किसान का थोड़ा भला हो सके."
इस बीच बादल लगातार गरज रहे हैं, बिजली चमक रही है और बारिश का सिलसिला जारी है. किसानों को फसल की गुणवत्ता और संभावित आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है. अब उनकी नजर मौसम पर टिकी है, वहीं मंडियों में रखे धान को बारिश से बचाने और खरीद प्रक्रिया सुचारू रखने के लिए ठोस इंतजाम करना भी जरूरी हो गया है. (कुलवीर सिंह की रिपोर्ट)