
पंजाब में हालिया बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने फसल नुकसान का आकलन कराने के आदेश जारी कर दिए हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ किया कि प्रभावित किसानों को नुकसान के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और इसके लिए गिरदावरी प्रक्रिया शुरू की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई करना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें सर्वे के बाद उचित मुआवजा मिलेगा. सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी को भी नुकसान के साथ अकेला नहीं छोड़ा जाएगा.
राज्य के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. अमृतसर, बठिंडा, मुक्तसर, होशियारपुर, तरनतारन और फतेहगढ़ साहिब समेत कई जिलों से फसल बर्बादी की खबरें सामने आई हैं. किसानों ने सरकार से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग भी उठाई थी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. इस सत्र में धार्मिक ग्रंथों के अपमान से जुड़े मामलों में सख्त सजा के प्रावधान को लेकर कानून में संशोधन लाने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा. सरकार ने कहा कि इस मामले में सख्त रुख अपनाया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को लेकर उठे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने के बाद उनकी बातों का अब कोई विशेष महत्व नहीं है. उन्होंने चड्ढा के हालिया बयान को महज संवाद करार देते हुए उस पर तंज भी कसा.
वहीं, चंडीगढ़ में हालिया धमाके की घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस बड़े मामलों को जल्द सुलझाने का रिकॉर्ड रखती है. उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए. बठिंडा में पुलिस स्टाफ बदलने के मामले में उन्होंने बताया कि कार्रवाई की गई है और जांच जारी है.
सरकार ने बिजली क्षेत्र में सुधार का दावा करते हुए कहा कि अब विभाग घाटे से उबरकर मुनाफे में आ गया है. 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली देने के बावजूद वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है. राज्य ने हाल के वर्षों में रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा किया है और ट्रांसमिशन क्षमता में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि पचवारा कोयला खदान से आपूर्ति फिर शुरू हो चुकी है, जिससे बिजली उत्पादन में स्थिरता आई है और बड़ी बचत भी हुई है. राज्य के थर्मल प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है. साथ ही, शाहपुर कंडी जलविद्युत परियोजना पर काम जारी है, जिससे आने वाले समय में बिजली उत्पादन बढ़ेगा.
सरकार ने अगले छह वर्षों में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा किसानों के खेतों से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना भी जल्द शुरू की जाएगी, जिससे खेती में बाधा कम होगी और सुरक्षा भी बढ़ेगी. (पीटीआई)