यवतमाल में कमजोर मॉनसून से सोयाबीन-कपास फसल बर्बाद! किसानों को याद आया साल 1972 का सूखा

यवतमाल में कमजोर मॉनसून से सोयाबीन-कपास फसल बर्बाद! किसानों को याद आया साल 1972 का सूखा

महाराष्ट्र के यवतमाल में बारिश की कमी से सोयाबीन और कपास की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. पुसद तहसील के किसानों ने फसल नुकसान, आर्थिक संकट और रोजगार की कमी को लेकर चिंता जताई है. किसानों ने एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर राहत और फसल बीमा का लाभ देने की मांग की है.

Yawatmal crop lossYawatmal crop loss
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 23, 2026,
  • Updated Sep 23, 2026, 12:00 PM IST

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में कमजोर मॉनसून के चलते बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर गंभीर असर पड़ रहा है. खासकर पुसद तहसील में सोयाबीन और कपास की फसलें बुरी तरह प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है. किसानों का कहना है कि सितंबर में ही सूखे की गंभीर स्थिति सामने आने से उन्हें 1972 के भीषण सूखे जैसे हालात की चिंता सताने लगी है. उनका कहना है कि अगर आगे भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसल नुकसान के साथ पेयजल और पशुओं के चारे का संकट भी गहरा सकता है.

किसान मनीष जाधव ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से लगातार फसल खराब होने के कारण ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है. उन्होंने कहा कि इस बार सोयाबीन और कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है और खेतों में काम कम होने से किसान मजदूर भी रोजगार की तलाश में दूसरे इलाकों की ओर जाने लगे हैं.

एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर राहत की मांग

मनीष जाधव ने सरकार से बिना कठिन शर्तों के तत्काल एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता देने की मांग की है. उन्होंने फसल बीमा का लाभ भी प्रभावित किसानों तक पहुंचाने की मांग रखी है. पानी और पशुओं के चारे की कमी आने वाले समय में बड़ी समस्या बन सकती है.

20 से 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत 

वहीं, किसान दुर्गादास राठौड़ ने कहा कि सोयाबीन की खेती पर प्रति एकड़ करीब 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद फसल की स्थिति ऐसी है कि उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और पशुओं की देखभाल करना मुश्किल होता जा रहा है.

खेतों में काम घटा, मजदूरों का पलायन

एक अन्‍य किसान सचिन साखरे ने बताया कि सूखे का असर सिर्फ खेती करने वाले परिवारों तक सीमित नहीं है. खेतों में कृषि गतिविधियां कम होने से मजदूरों के लिए भी रोजगार के अवसर घट रहे हैं. ऐसे में ग्रामीण परिवार काम की तलाश में शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं. किसान आदित्य जाधव ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई.

उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है और अब तत्काल राहत की जरूरत है. उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए जल्द सरकारी हस्तक्षेप और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की. यवतमाल में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कभी अत्यधिक बारिश तो कभी लंबे सूखे दौर ने खेती को प्रभावित किया है. लगातार फसल नुकसान के कारण कई परिवारों के सामने भोजन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य खर्च और पशुओं के पालन का संकट खड़ा हो गया है.

सरकार ने राहत प्रक्रिया शुरू की

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सूखा प्रभावित और सूखा जैसी स्थिति वाले इलाकों में राहत के लिए कदम उठाने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राहत से जुड़े फैसले चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप समिति लेगी. प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का पंचनामा बुधवार से शुरू किया जाएगा. राज्य सरकार ने कहा है कि केंद्रीय सहायता का इंतजार किए बिना राहत प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

सरकार ने पेयजल और पशुओं के चारे को प्राथमिकता देने की बात कही है. इसके लिए अगले सात से आठ महीनों को ध्यान में रखकर योजना तैयार करने की बात कही गई है. राज्‍य सरकार ने माना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी फसलों पर खासा असर पड़ा है. (एएनआई)

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