Crop Loss: अहिल्यानगर में बारिश की कमी से फसलें बर्बाद, कर्ज के बोझ तले दबे किसान

Crop Loss: अहिल्यानगर में बारिश की कमी से फसलें बर्बाद, कर्ज के बोझ तले दबे किसान

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका में बारिश की कमी से कपास और बाजरे की फसलें प्रभावित हुई हैं. टलणी गांव के किसान राजाभाऊ सातपुते की तीन एकड़ फसल खराब हो गई है.

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क‍िसान तक
  • Ahilyanagar,
  • Sep 22, 2026,
  • Updated Sep 22, 2026, 12:15 PM IST

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका में बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सितंबर का महीना खत्म होने को है, लेकिन कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. बारिश पर निर्भर खेती वाले इस इलाके में पानी की कमी का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ा है. टलणी गांव के किसान राजाभाऊ सातपुते के पास तीन एकड़ जमीन है. उन्होंने दो एकड़ में कपास और एक एकड़ में बाजरा बोया था. किसान को उम्मीद थी कि सितंबर में बारिश होने से फसलों को जरूरी पानी मिल जाएगा, लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों की स्थिति बिगड़ती चली गई.

कुओं का पानी नीचे गया, कपास पूरी तरह सूखी

किसान ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण खेतों के साथ कुओं में भी पानी का स्तर तेजी से नीचे चला गया है. उनकी तीन एकड़ में लगी कपास की फसल पानी के अभाव में सूखकर बर्बाद हो गई. बाजरे में बालियां तो आईं, लेकिन दाने नहीं भर पाए. इससे बाजरे की फसल भी खराब हो गई.

12 लाख रुपये का कर्ज चढ़ा

राजाभाऊ सातपुते के मुताबिक, तीन एकड़ की खेती पर करीब 40 से 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं. वहीं, उनके सिर पर करीब 12 लाख रुपये का बैंक कर्ज है. फसल खराब होने के बाद अब उनके सामने खेती पर किए गए खर्च की भरपाई और बैंक कर्ज चुकाने की चुनौती है.

बच्चों की पढ़ाई पर आर्थिक संकट का असर

सातपुते के परिवार में नौ सदस्य हैं. उनका कहना है कि खराब आर्थिक स्थिति का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. फसल से आमदनी की उम्मीद टूटने के बाद परिवार के रोजमर्रा के खर्च को संभालना भी मुश्किल हो गया है.

शेवगांव के कई किसान बारिश की कमी से परेशान

टलणी गांव के अलावा शेवगांव तालुका के कई किसान बारिश की कमी से प्रभावित हैं. किसानों का कहना है कि अगर जल्द मदद नहीं मिली तो खेती के साथ पशुओं को पालना भी मुश्किल हो सकता है. बारिश की कमी के कारण चारे की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है.

किसानों ने आर्थिक मदद और चारे की मांग की

किसानों ने सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है. इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर चारा छावनियां शुरू करने की मांग भी उठाई है. किसानों का कहना है कि पानी और चारे की व्यवस्था नहीं हुई तो उन्हें पशुओं के साथ दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

सरकार की मदद पर टिकी किसानों की नजर

बारिश की कमी, सूखती फसलें, बढ़ता कर्ज और परिवार का खर्च. इन चुनौतियों के बीच शेवगांव के किसानों की नजर अब सरकारी सहायता पर टिकी है. किसानों को उम्मीद है कि फसल और पशुधन को हुए नुकसान को देखते हुए जल्द राहत के कदम उठाए जाएंगे. (रोह‍ित वाल्‍के की रिपोर्ट)

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