
खरीफ 2026 सीजन में देश के कुल फसल क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले मामूली कमी दर्ज की गई है. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की 18 सितंबर 2026 तक की प्रोग्रेसिव क्रॉप एरिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कुल खरीफ फसल क्षेत्र 1,103.90 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,118.95 लाख हेक्टेयर था. यानी कुल रकबा 15.05 लाख हेक्टेयर या 1.35 फीसदी घटा है. रिपोर्ट के मुताबिक, कपास में इस साल रकबे में गिरावट देखने को मिली है. 2026-27 में कपास की बुवाई 109.61 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 110.60 लाख हेक्टेयर थी. इस तरह कपास का रकबा 0.99 लाख हेक्टेयर घटा है, जो 0.90 फीसदी की कमी है. हालांकि, यह आंकड़ा सामान्य रकबे की तुलना में भी कम है. कपास का सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर है.
खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान के रकबे में भी कमी आई है. इस साल 429.28 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल यह 445.92 लाख हेक्टेयर थी. यानी 16.64 लाख हेक्टेयर की कमी रही और रकबा 3.73 फीसदी नीचे है. मक्का का क्षेत्र भी 2.12 लाख हेक्टेयर घटकर 92.76 लाख हेक्टेयर रह गया है.
पिछले साल मक्का 94.88 लाख हेक्टेयर में बोया गया था. इसमें 2.23 फीसदी की कमी दर्ज हुई है. वहीं, गन्ने का रकबा भी मामूली घटा है. 2026-27 में यह 58.47 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल 58.87 लाख हेक्टेयर था. यानी 0.40 लाख हेक्टेयर या 0.69 फीसदी की कमी रही.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दलहन वर्ग की तस्वीर थोड़ी अलग है. कुल दलहन क्षेत्र इस साल 119.65 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल 117.94 लाख हेक्टेयर था. यानी 1.71 लाख हेक्टेयर या 1.45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी में उड़द की अहम भूमिका रही. उड़द का रकबा 23.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.89 लाख हेक्टेयर हो गया. इसमें 2.77 लाख हेक्टेयर या 11.97 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. तुअर का रकबा भी 0.89 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. हालांकि, मूंग का क्षेत्र 1.37 लाख हेक्टेयर घटा है और अन्य दलहनों में भी कमी दर्ज हुई है.
तिलहन की कुल तस्वीर में इस साल लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है. कुल तिलहन क्षेत्र 194.76 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 194.75 लाख हेक्टेयर था. अंतर सिर्फ 0.01 लाख हेक्टेयर है. हालांकि, अलग-अलग तिलहनों में तस्वीर काफी अलग रही. सोयाबीन के रकबे में भी इस खरीफ सीजन मामूली गिरावट दर्ज हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक सोयाबीन की बुवाई 122.22 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 123.11 लाख हेक्टेयर थी.
इस तरह सोयाबीन का रकबा 0.89 लाख हेक्टेयर घटा है, जो 0.72 फीसदी की कमी है. वहीं, सोयाबीन का सामान्य क्षेत्रफल 128.71 लाख हेक्टेयर है. इधर, तिल और सूरजमुखी की खेती के रकबे में इस खरीफ सीजन बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तिल का क्षेत्र पिछले साल के 9.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.08 लाख हेक्टेयर हो गया, यानी 1.29 लाख हेक्टेयर या 13.22 फीसदी की वृद्धि हुई. वहीं, सूरजमुखी का रकबा 0.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर पहुंच गया. इसमें 0.59 लाख हेक्टेयर या 84.34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है.
मोटे अनाज में भी मिश्रित तस्वीर सामने आई है. कुल श्री अन्न और मोटे अनाज का क्षेत्र पिछले साल के 184.63 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस साल 185.79 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसमें 1.16 लाख हेक्टेयर या 0.63 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं, ज्वार का रकबा 12.61 लाख से बढ़कर 13.79 लाख हेक्टेयर हो गया, यानी 1.18 लाख हेक्टेयर या 9.39 फीसदी की वृद्धि हुई. बाजरा भी 62.87 लाख से बढ़कर 64.94 लाख हेक्टेयर हो गया, जो 2.07 लाख हेक्टेयर या 3.29 फीसदी की बढ़ोतरी है. वहीं रागी का क्षेत्र 10.12 लाख से घटकर 9.81 लाख हेक्टेयर रह गया.
बुवाई के आंकड़ों के बीच कई राज्यों में अल नीनो के असर के चलते बारिश की कमी देखी जा रही है. कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. यहां तक कि कर्नाटक सरकार 124 तहसीलों में सूखा घोषित कर चुकी है. वहीं, महाराष्ट्र में भी सूखा घोषित करने की मांग तेज है. किसान गन्ना, सोयाबीन, मक्का सहित कई फसलों के सूखने की बात कह रहे हैं. वहीं, अन्य दक्षिणी राज्यों में सिंचाई के पानी की समस्या खड़ी हो गई है.