
हरियाणा सरकार द्वारा मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने के बावजूद करनाल की अनाज मंडी में किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. मंडी में मक्के के दाम 1300 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है.
मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसानों का कहना है कि कागजों में एमएसपी जरूर तय होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पाता. किसान सरकार से मक्का की सरकारी खरीद शुरू करने और MSP लागू करवाने की मांग कर रहे हैं.
उचा समाना गांव से आए किसान नफे सिंह ने बताया कि वह करीब डेढ़ एकड़ की मक्के की फसल लेकर करनाल मंडी पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि इस समय मंडी में मक्के का रेट बेहद कम मिल रहा है.
नफे सिंह के मुताबिक, “पहले मक्का 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, लेकिन अब यह घटकर करीब 1800 रुपये रह गया है. MSP तो आजकल मिल ही नहीं रहा.” उन्होंने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से मक्के की खेती कर रहे हैं और इस बार फसल की पैदावार भी अच्छी हुई है, लेकिन बाजार भाव कम होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसान ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि मक्के की फसल को MSP पर खरीदा जाए. उन्होंने यह भी कहा कि “फसल का उठान और भुगतान समय पर हो जाता है, लेकिन सही दाम नहीं मिलते.”
एक अन्य किसान राजकुमार ने बताया कि वह अपनी एक एकड़ की मक्के की फसल लेकर मंडी में आए थे. उन्होंने बताया कि मंडी में मक्के का भाव 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गया है, जबकि अच्छी क्वालिटी का मक्का 1700-1800 रुपये में बिक रहा है.
राजकुमार ने कहा, “आज तक हमारी फसल MSP पर नहीं खरीदी गई. मंडी में किसानों को सिर्फ समस्याएं ही झेलनी पड़ती हैं.” उन्होंने आगे बताया कि फसल सूखने तक उन्हें कई दिन मंडी में इंतजार करना पड़ता है. “तीन-तीन दिन तक फसल पड़ी रहती है, लेकिन खरीद नहीं होती,” उन्होंने कहा.
राजकुमार के अनुसार, उन्होंने इस बार पहली बार मक्का की खेती की, लेकिन वर्तमान हालात को देखकर वह निराश हैं.
किसानों का कहना है कि सरकार MSP घोषित जरूर करती है, लेकिन खरीद की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बाजार के कम दामों पर ही फसल बेचनी पड़ती है. इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है.
इस पूरे मामले पर हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार इस स्थिति को समझती है और किसानों को राहत देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि करनाल, अंबाला, कुरुक्षेत्र सहित कई जिलों में मक्का की खेती होती है और सीजन के दौरान मक्के का रेट 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक रहता है. मंत्री ने बताया कि ग्रीष्मकालीन फसल के लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और खरीद प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई की जा रही है.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि “सरकार पूरी कोशिश कर रही है और किसानों को मक्के का उचित मूल्य मिलेगा.”
करनाल मंडी में मक्का की कीमतों का MSP से काफी नीचे रहना किसानों के लिए चिंता का विषय है. जहां एक ओर सरकार उचित मूल्य दिलाने का दावा कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है. अब देखना होगा कि सरकारी कदम कब तक किसानों को राहत दे पाते हैं.