छत्‍तीसगढ़ के छुईखदान में लौट रही पान की हरियाली, रंग ला रहा अनुसंधान केंद्र, सब्सिडी से किसानों की बढ़ी उम्‍मीदें

छत्‍तीसगढ़ के छुईखदान में लौट रही पान की हरियाली, रंग ला रहा अनुसंधान केंद्र, सब्सिडी से किसानों की बढ़ी उम्‍मीदें

छुईखदान में लगभग खत्म हो चुकी पान की खेती को फिर से खड़ा करने की बड़ी पहल शुरू हुई है. अनुसंधान केंद्र, शेडनेट हाउस पर अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों में नई उम्मीद जगी है. क्या यह कोशिश इलाके की पहचान और किसानों की आय बदल पाएगी.

Pan Ki Kheti Chhattisgarh Pan Ki Kheti Chhattisgarh
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 03, 2026,
  • Updated Mar 03, 2026, 2:24 PM IST

छत्‍तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ब्‍लॉक छुईखदान में सालों से लगभग गुम हो चुकी पान की खेती अब फिर से चर्चा में है. कभी इस क्षेत्र की पहचान रही यह परंपरागत फसल तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के अभाव में धीरे-धीरे सिमट गई थी. अब राज्य शासन की पहल और जिला प्रशासन की सक्रियता से इसे दोबारा चालू करने की ठोस कोशिश शुरू हो गई है.

किसानों को मिल रही जरूरी जानकारी

वर्ष 2023-24 में छुईखदान में पान अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की घोषणा के बाद इसे रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय छुईखदान में स्थापित किया गया है. यह केंद्र न सिर्फ वैज्ञानिक पद्धति से पान उत्पादन की तकनीक विकसित करने पर काम कर रहा है, बल्कि स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दे रहा है, ताकि खेती टिकाऊ और लाभकारी बन सके.

किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही

पान उत्पादकों को आर्थिक संबल देने के लिए शेडनेट हाउस निर्माण पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दिया जा रहा है. फिलहाल 7 किसानों ने 500 वर्गमीटर प्रति किसान क्षेत्र में शेडनेट हाउस तैयार किए हैं. हर किसान को 1.77 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है. इनमें से 6 किसान पान की खेती शुरू भी कर चुके हैं.

सरकारी उद्यानों में तैयार की जा रही नर्सरी

नियंत्रित वातावरण में उत्पादन होने से मौसम की मार का खतरा कम होगा और पत्तियों की गुणवत्ता बेहतर रहने की उम्मीद है. रोपण सामग्री की कमी दूर करने के लिए जिले की शासकीय उद्यान रोपणियों कुकुरमुड़ा और बीरूटोला में प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जा रहे हैं. इससे स्थानीय स्तर पर पौध तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लागत घटेगी और खेती का दायरा बढ़ेगा. 

पहल की लगातार हो रही मॉनिटरिंग

बता दें कि जिला प्रशासन इस पूरी पहल की रेगुलर मॉनिटरिंग कर रहा है. कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर रहे हैं, जबकि महाविद्यालय के विशेषज्ञ किसानों को तकनीकी सलाह दे रहे हैं.

पान खाने के फायदे

  • पान की पत्तियों में प्राकृतिक सुगंधित तत्व और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो मुंह की दुर्गंध कम करने और ताजगी बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं.
  • पारंपरिक तौर पर भोजन के बाद पान का सेवन पाचन क्रिया को सक्रिय करने के लिए किया जाता रहा है.
  • आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, पान की पत्तियों का उपयोग हल्के सर्दी-जुकाम और गले की खराश में घरेलू उपाय के रूप में भी किया जाता है.
  • कुछ क्षेत्रों में पान की पत्ती का लेप त्वचा पर भी लगाया जाता है, जिसे लोक उपचार पद्धति का हिस्सा माना जाता है.

MORE NEWS

Read more!