
अप्रैल महीने के शुरुआती दिनों में जहां तेज धूप और गर्मी से लोग काफी परेशान थे, वहीं अप्रैल के आखिरी सप्ताह में बिहार के अंदर मौसम में जो बदलाव हुआ, उसका असर मई महीने के शुरुआती दिनों में भी देखने को मिल रहा है. वहीं सोमवार को बिहार की राजधानी पटना में मौसम का एक अलग ही बदलाव देखने को मिला, जहां करीब 4:30 बजे के आसपास पूरा शहर बादलों की छाया में इस कदर डूब गया कि शहर में अंधेरे जैसा असर देखने को मिला. हालांकि बारिश की बूंदों के बीच यह अंधेरा धीरे-धीरे कम होता दिखाई दिया. वहीं मौसम विभाग की मानें तो बिहार के अधिकांश जिलों, विशेष तौर से उत्तर बिहार के जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना अधिक रहेगी.
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के वैज्ञानिक आशीष कुमार ने 'किसान तक' को बताया कि आगामी 5 दिनों तक राज्य के विभिन्न जिलों में आंधी, तूफान और बारिश की संभावनाएं बनी रहेंगी. वहीं उत्तर बिहार के इलाकों में इसका असर अधिक देखने को मिलेगा. विशेष तौर से 6 मई को उत्तर बिहार में भारी बारिश होने की संभावना अधिक है. इसके बाद धीरे-धीरे मौसम में बदलाव होगा और अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है. वहीं मौसम विभाग द्वारा जारी सूचना में बताया गया था कि सोमवार को अधिकांश जिलों में आंधी, तूफान, ओलावृष्टि और बारिश की संभावना अधिक है, जिसका असर राजधानी पटना समेत अन्य जिलों में देखने को मिला.
भागलपुर जिले के आम की बागवानी करने वाले किसान मनीष सिंह कहते हैं कि अभी आम को गर्मी की जरूरत है, लेकिन जिस तरह से मौसम में बदलाव हुआ है, वह आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. बारिश और तूफान न केवल आम के फल को पेड़ों से गिरा रहे हैं, बल्कि इससे आम के आकार पर भी असर पड़ रहा है. साथ ही आम पर दाग भी पड़ रहे हैं, जिसका असर यह होगा कि बाजार में आम का दाम अपने आप कम हो जाएगा. मनीष सिंह विदेशों में भी आम भेजते हैं और उनका कहना है कि अगर आम पर दाग पड़ गया, तो वे इसे बाहर नहीं भेज पाएंगे. उन्होंने बताया कि इस बार आम का उत्पादन करीब 30 प्रतिशत ही हुआ है और ऐसी बारिश आम के लिए काफी नुकसानदेह है.
बिहार लीची ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा सिंह कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में स्टिंग बग कीटों की वजह से लीची की खेती प्रभावित हुई है. इसके साथ ही बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान लीची को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं. केवल बारिश होती तो लीची को ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवा की वजह से नुकसान बढ़ जाता है. अभी तक करीब 10 से 15 प्रतिशत नुकसान हो चुका है. वहीं इस बार लीची का फल पिछले साल की तुलना में बहुत कम है, यूं कहें तो एक तिहाई ही फल आया है. इसकी वजह नवंबर और दिसंबर में पड़ी लंबी गर्मी है, जिसके कारण नए पत्ते निकल आए और इसका असर फलन पर पड़ा.