
बिहार सरकार ने बिहार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद की बात दोहराई है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को धान बिक्री के 24 घंटे के भीतर भुगतान मिल जाए और जिन किसानों का भुगतान किसी कारणवश लंबित रह गया है, उनका भुगतान जल्द से जल्द करने का निर्देश खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने दिया है.
मंगलवार को सचिव अभय कुमार सिंह ने बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (बीएसएफसी) के मुख्यालय में निगम की समीक्षा बैठक की. बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पेंडिंग भुगतानों को FIFO (फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट) प्रणाली के तहत प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
इससे पहले खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी धान खरीद को लेकर अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं. अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने धान खरीद को सुचारू बनाए रखने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि धान खरीद में जो कर्मचारी लगे हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. धान की खरीद तेजी से चले और किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, मुख्यमंत्री ने इसका निर्देश दिया.
सामान्य ग्रेड के धान का MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि ग्रेड A धान का दाम 2,389 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा. धान खरीद की अवधि 1 नवंबर, 2025 से 28 फरवरी, 2026 तक तय की गई है. बिहार में धान खरीद का काम स्टेजवाइज शुरू किया गया है, और इस साल धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन रखा गया है. प्रधान सचिव की मुताबिक, राज्य में उसना (पारबॉयल्ड) चावल मिलों की संख्या अब बढ़कर 396 हो गई हैऔर सभी 38 जिलों में धान की खरीद जारी है.
साथ ही, मिलों के निबंधन और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) से संबंधित विषयों की समीक्षा करते हुए सचिव ने निर्देश दिया कि 10 जनवरी 2026 तक मिलों से मिले एफआरके सैंपलों की जांच अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाए, जिससे खाद्यान्न की क्वालिटी मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके.
बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं—प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री पोषण योजना, गेहूं आधारित पोषण योजना, किशोरियों के लिए पोषण योजना, कल्याणकारी संस्थान और छात्रावास योजना की भी समीक्षा की गई. सचिव ने कहा कि इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने में बीएसएफसी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और इसे और अधिक मजबूत किए जाने की जरूरत है.
सचिव ने एफसीआई से खाद्यान्न के उठाव से लेकर डिस्पैच तक की सभी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष बल दिया, ताकि खाद्यान्न समय पर लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सके. इसके साथ ही, खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था में जिन जिलों में समस्याएं सामने आई हैं, वहां जल्द से जल्द समस्या निपटाने के निर्देश भी दिए गए.(रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट)