
बिहार में इस साल खाद्यान्न उत्पादन कम रहने की संभावना जताई गई है. इसका मुख्य कारण हाल में आए मोथा तूफान और बेमौसम बारिश को माना जा रहा है, जिसने फसलों को नुकसान पहुंचाया. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि धान और गेहूं जैसी फसलें उनकी कमाई और घरेलू खर्च का आधार हैं.
राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में तीसरे अनुमान के अनुसार बिहार में कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 226.71 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. यह पिछले साल 2024-25 के मुकाबले करीब 21 लाख मीट्रिक टन कम है. पिछले साल राज्य में 247.83 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था.
मंत्री ने बताया कि नवंबर 2025 में आए मोथा तूफान और मार्च में हुई बेमौसम बारिश की वजह से फसलों को नुकसान हुआ, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ा. खासतौर पर धान, गेहूं, मक्का जैसी प्रमुख फसलों को नुकसान होने की बात सामने आई है. ये सभी फसलें किसानों की आय का जरिया हैं जिसे बेचकर वे अपनी कमाई सुनिश्चित करते हैं.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय में बिहार ने अच्छी तरक्की की है. साल 2005 की तुलना में राज्य में खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है. इसका श्रेय 2008 से लागू किए गए कृषि रोड मैप और योजनाबद्ध खेती को दिया गया.
इस बीच, राज्य सरकार किसानों की मदद के लिए कई कदम उठा रही है. खासकर दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने, अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने और अलग-अलग कई फसलों की खेती पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग मांगा गया है.
दूसरी ओर, राज्य में किसानों के लिए फार्मर आईडी और ई-केवाईसी अभियान भी तेजी से चल रहा है. अब तक करीब 88 लाख किसानों का e-KYC पूरा हो चुका है, जबकि 48 लाख से ज्यादा किसानों को फार्मर आईडी जारी की जा चुकी है.
कृषि विभाग का कहना है कि आने वाले समय में संकर (हाइब्रिड) धान, मक्का, सरसों और सोयाबीन जैसी फसलों पर खास ध्यान दिया जाएगा ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और किसानों की आय में सुधार हो.
कुल मिलाकर मोथा तूफान और बेमौसम बारिश ने इस साल की खेती पर असर डाला है, जिससे उत्पादन कम होने का अनुमान है. हालांकि सरकार योजनाओं के जरिए इस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में जुटी है. इसके लिए बिहार सरकार ने केंद्र से मदद की मांग उठाई है और दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने की अपील की है.