
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए डेयरी सेक्टर पर बड़ा दांव खेल रही है. सरकार अब दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय के मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों के गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी में है. इसका मकसद महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है.
इसी कड़ी में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संयुक्त बैठक में अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि किसानों और युवाओं को भी बड़े पैमाने पर दुग्ध उत्पादन से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश के 42 जिलों के 7,220 गांवों में करीब 3.94 लाख महिला सदस्य दुग्ध उत्पादन के काम से जुड़ी हुई हैं. इन महिलाओं के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 10.77 लाख लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है.
सबसे खास बात यह है कि डेयरी व्यवसाय ने हजारों महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदल दी है. अब तक 72,669 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है.
दुग्ध क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों का कुल कारोबार लगभग 5,839 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. वहीं इन कंपनियों ने करीब 133 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है. इससे साफ है कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आय का मजबूत स्रोत बनता जा रहा है.
प्रदेश में अलग-अलग मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों के जरिए बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है.
बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
7 जिलों के 1,440 गांवों में सक्रिय
95,100 सदस्य जुड़े
प्रतिदिन 2.50 लाख लीटर दूध उत्पादन
काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
10 जिलों के 1,770 गांवों में संचालन
55 हजार सदस्य जुड़े
प्रतिदिन 1.60 लाख लीटर दूध उत्पादन
सामार्थ्या मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
10 जिलों के 1,550 गांवों में सक्रिय
करीब 1 लाख सदस्य जुड़े
बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
7 जिलों के 1,160 गांवों में कार्यरत
73,283 सदस्य जुड़े
सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी
8 जिलों के 1,900 गांवों में सक्रिय
71,320 सदस्य जुड़े
गांव-गांव चलाया जाएगा जागरुकता अभियान
सरकार ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम स्तर तक विशेष जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही रजिस्ट्रेशन, आवेदन और दस्तावेजों की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं और ग्रामीण परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें.
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जरूरतमंद महिलाओं को विभागीय स्तर पर हर संभव सहायता दी जाए.
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और एक करोड़ लखपति दीदी के संकल्प को उत्तर प्रदेश में डेयरी क्रांति के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन ग्रामीण महिलाओं के लिए नियमित और स्थायी आय का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है. सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को इस मॉडल से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के साथ डेयरी व्यवसाय किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सबसे भरोसेमंद साधन है. यदि यह मॉडल प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचता है, तो इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और दुग्ध उत्पादन को भी नई रफ्तार मिलेगी. ग्रामीण महिलाओं के लिए यह पहल एक नई डेयरी क्रांति साबित हो सकती है.