
ये बात सही है कि पोल्ट्री में मुर्गे (चिकन) की बहुत डिमांड है. चिकन के मुकाबले बटेर की संख्या बहुत कम है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि बटेर को दरकिनार कर दिया गया हो, लगातार इसकी डिमांड बढ़ रही है. बटेर का मीट और उसके अंडे की सर्दियों में खूब डिमांड रहती है. हालांकि चिकन के मुकाबले बटेर को मीट महंगा होता है, लेकिन शौकीन लोग इसे खाने में बहुत पसंद करते हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक बटेर के मीट में पौष्टिकता के ज्यादातर गुण पाए जाते हैं. बटेर भी मुर्गे-मुर्गी की तरह से एक एक पोल्ट्री बर्ड है.
बटेर पालन भारत में एक तेजी से बढ़ता कारोबार बन रहा है. यह कारोबार कम लागत और कम जगह में होने के चलते लोगों की पसंद बन रहा है. राज्य की पोल्ट्री पॉलिसी और जरूरी लाइसेंस के बाद इसे शुरू किया जा सकता है. सिर्फ 50 हजार रुपये की मामूली लागत पर इसे शुरू किया जा सकता है. अगर आप भी इसे करना चाहते हैं तो ये एकदम सही वक्त है.
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राज नारायण का कहना है कि बटेर का इस्तेमाल सिर्फ मीट और अंडे के लिए ही नहीं किया जाता है. बटेर से करीब पांच से छह तरह के प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. लेकिन बटेर से प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है. बरेली में ये ट्रेनिंग दी जाती है. बटेर के अंडे का अचार बहुत अच्छी रेसिपी मानी जाती है. बटेर का मीट चिकन बहुत महंगा मिलता है. चिकन दो से ढाई सौ रुपए किलो तक मिल जाता है. जबकि बटेर का मीट एक हजार रुपये से लेकर से 1200 रुपये किलो तक बिकता है. हालांकि मौसम के हिसाब से इसके दाम घटते-बढ़ते रहते हैं.
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