Bater Farming: अभी शुरू किया बटेर पालन तो सर्दियों में खूब होगा मुनाफा 

Bater Farming: अभी शुरू किया बटेर पालन तो सर्दियों में खूब होगा मुनाफा 

Bater Farming बटेर के मीट में प्रोटीन की मात्रा 25 फीसद तक होती है. खाने में बटेर के प्रोटीन को बहुत अच्छा माना जाता है. बटेर के अंडों की बात करें तो इसमे 41 तत्व पाए जाते हैं. मुर्गी पालन की तरह से बटेर से लम्बे वक्त तक मुनाफा नहीं कमा सकते हैं. बटेर सिर्फ 60 हफ्ते तक ही अंडे देती है. हालांकि जंगली बटेर पांच से छह साल तक अंडे दे सकती है.

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 08, 2026,
  • Updated Sep 08, 2026, 9:00 AM IST

ये बात सही है कि पोल्ट्री में मुर्गे (चिकन) की बहुत डिमांड है. चिकन के मुकाबले बटेर की संख्या बहुत कम है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि बटेर को दरकिनार कर दिया गया हो, लगातार इसकी डिमांड बढ़ रही है. बटेर का मीट और उसके अंडे की सर्दियों में खूब डिमांड रहती है. हालांकि चिकन के मुकाबले बटेर को मीट महंगा होता है, लेकिन शौकीन लोग इसे खाने में बहुत पसंद करते हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक बटेर के मीट में पौष्टिकता के ज्यादातर गुण पाए जाते हैं. बटेर भी मुर्गे-मुर्गी की तरह से एक एक पोल्ट्री बर्ड है.

बटेर पालन भारत में एक तेजी से बढ़ता कारोबार बन रहा है. यह कारोबार कम लागत और कम जगह में होने के चलते लोगों की पसंद बन रहा है. राज्य की पोल्ट्री पॉलिसी और जरूरी लाइसेंस के बाद इसे शुरू किया जा सकता है. सिर्फ 50 हजार रुपये की मामूली लागत पर इसे शुरू किया जा सकता है. अगर आप भी इसे करना चाहते हैं तो ये एकदम सही वक्त है. 

बटेर पालन से जुड़ी कुछ जरूरी बात

  • सिर्फ 50 हजार रुपये जैसी छोटी रकम लगाकर बटेर पालन से सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है. 
  • बटेर बहुत छोटा पक्षी होता है, इसलिए मुर्गी पालन की तरह से इसके लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है. 
  • बटेर की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. मादा बटेर 40 से 45 दिन में अंडा देने के लिए तैयार हो जाती है, वहीं मीट के लिए भी 50 दिन तक की बटेर बाजार में बिक जाती है. 
  • मुर्गियों के मुकाबले बटेर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होती है, इसलिए बटेर जल्दी बीमारियों की चपेट में नहीं आती है. 
  • जापानी बटेर (Japanese Quail) और बॉब व्हाइट बटेर (Bob white Quail) जैसी नस्लें ज्यादा मुनाफा देने वाली मानी जाती हैं. इन्हें भारत में भी पाला जाता है. 
  • बटेर के मीट और अंडों की होटल-रेस्टोरेंट में बहुत डिमांड होत है. वहीं सर्दियों के मौसम में खुले बाजार में भी बटेर के मीट की बहुत डिमांड होती है. 

बटेर से बनते हैं 5 से 6 प्रोडक्ट 

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राज नारायण का कहना है कि बटेर का इस्तेमाल सिर्फ मीट और अंडे के लिए ही नहीं किया जाता है. बटेर से करीब पांच से छह  तरह के प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. लेकिन बटेर से प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है. बरेली में ये ट्रेनिंग दी जाती है. बटेर के अंडे का अचार बहुत अच्छी रेसिपी मानी जाती है. बटेर का मीट चिकन बहुत महंगा मिलता है. चिकन दो से ढाई सौ रुपए किलो तक मिल जाता है. जबकि बटेर का मीट एक हजार रुपये से लेकर से 1200 रुपये किलो तक बिकता है. हालांकि मौसम के हिसाब से इसके दाम घटते-बढ़ते रहते हैं.

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