
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार गोशालाओं के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है. जहां गोबर से ऊर्जा, गोमूत्र से मूल्यवर्धित उत्पाद और गो उत्पाद आधारित उद्योगों के जरिए रोजगार और आय का नया चक्र तैयार होगा. इसी विजन को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने लखनऊ में उद्यमियों, नवाचारी किसानों, गोसेवी संस्थाओं और गोशाला संचालकों के साथ व्यापक संवाद किया. दरअसल, ग्लोबल कन्फेडरेशन ऑफ काउ-बेस्ड इंडस्ट्रीज (GCCI) के सचिव पुरीष कुमार ने एक ऐसा आर्थिक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने गोशालाओं की संभावनाओं को नई दिशा दी.
पुरीष कुमार ने बताया कि 200 गायों वाली गोशाला में दूध, गोबर और गोमूत्र का वैज्ञानिक मूल्यवर्धन किया जाए तथा बायोगैस, जैविक खाद, प्राकृतिक कृषि इनपुट और अन्य गो आधारित उत्पादों का व्यवस्थित उत्पादन हो, तो सालाना लगभग दो करोड़ रुपये तक की संभावित आय अर्जित की जा सकती है. इससे गोशालाएं संरक्षण केंद्र के साथ-साथ ग्रामीण उद्यम का मजबूत आधार बन सकती हैं.
बनासकांठा, गुजरात की गोमूत्र डेयरी के देवाराम पुरोहित ने बताया कि गुजरात के अबाला गांव में गोमूत्र के संग्रहण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर प्राकृतिक कृषि के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
इसके माध्यम से स्थानीय ग्रामीण परिवारों को आय का अवसर मिलने के साथ प्राकृतिक एवं रसायनमुक्त कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है.
उधर, ग्राम धाम गोशाला, सिद्धपुरा, लखनऊ के संचालक पूर्व पुलिस उपाधीक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने गोशाला में विकसित गोवंश-आधारित विद्युत उत्पादन मॉडल की जानकारी साझा की. वहीं, पे अमृत संस्था के निदेशक प्रवीण मिश्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की गोशाला केवल गोवंश संरक्षण का स्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण सर्कुलर बायो-इकोनॉमी हब होगी। रूरल हब इनोवेशंस लिमिटेड के गौरव गुप्ता ने ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, उद्यमिता एवं स्थानीय संसाधनों के मूल्यवर्धन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए.
उन्होंने गोशालाओं और ग्रामीण युवाओं को तकनीक, बाजार एवं उद्यमिता से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर विचार रखा. उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं में हो रहे नवाचारों को श्रेष्ठ तकनीकों और सफल मॉडलों से जोड़ा जाएगा. ताकि गोसंरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि का स्थायी मॉडल विकसित हो सके. वहीं, गोशालाओं में हो रहे नवाचारों को श्रेष्ठ तकनीकों और सफल मॉडलों से जोड़ा जाएगा.
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