Animal Disease: लंपी ही नहीं FMD से बचाव के उपाय भी हैं बहुत जरूरी, पढ़ें डिटेल

Animal Disease: लंपी ही नहीं FMD से बचाव के उपाय भी हैं बहुत जरूरी, पढ़ें डिटेल

Animal Disease बीमारी से बचाव के उपाय अपनाकर बहुत सारे देश आज एफएमडी फ्री घोषित हो चुके हैं. क्योंकि अभी तक इस बीमारी के इलाज के नाम पर सिर्फ वैक्सीन है. हालांकि सरकार का मानना है कि एफएमडी के वैक्सीनेशन से सरकार का करोड़ों रुपया खर्च हो जाता है. ये वायरस से होने वाली बीमारी है. इसके सक्रिय होने और फैलने का भी कोई तय वक्त नहीं है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 11, 2026,
  • Updated Sep 11, 2026, 4:14 PM IST

लंपी बीमारी के चलते पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है. यूपी, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में गायों की लंपी बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है. यूपी, राजस्थान और हरियाणा से गायों की मौत होने की खबर भी आ रही है. लेकिन लंपी के चलते पशुपालक कहीं खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी को लेकर लापरवाह न हो जाएं, इसलिए एफएमडी को लेकर भी हाई अलर्ट जारी किया जा चुका है. अलग-अलग जगहों से एडवाइजरी भी जारी की जा रही है. गौरतलब रहे एफएमडी बीमारी गाय-भैंस समेत भेड़-बकरियों को भी होती है. 

ये बीमारी खासतौर पर उन सभी पशुओं को होती है जिनके खुर होते हैं और खुर के बीच में जगह होती है. पशुओं की इस बीमारी से आज हर एक देश परेशान है. एनिमल एक्स्पर्ट की मानें तो एफएमडी बीमारी की रोकथाम के लिए ये जरूरी है कि हमे उसके लक्षण पता हों. बीमारी फैलने के कारण कौन-कौन से हैं ये भी पता होना जरूरी है. साथ ही अगर किसी पशु को ये बीमारी हो जाए तो उस वक्त क्या करना चाहिए इस बात की जानकारी भी होना बहुत जरूरी है. तभी पशुओं को एफएमडी से बचाने में मदद मिलेगी. 

ऐसे पहचानें एफएमडी के लक्षण 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि एफएमडी दुधारू पशु गाय-भैंस, भेड़-बकरी में तो होती है साथ में घोड़े जैसे पशुओं में भी होती है. इसीलिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है. क्योंकि जैसे ही आप लक्षण पहचान लेंगे तो उसे फैलने से रोकने के लिए जरूरी उपाय भी अपना लेंगे. 

  • पशु को 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. 
  • एफएमडी पीडि़त पशु की भूख कम हो जाएगी. 
  • एफएमडी से पीडि़त पशु सुस्त रहने लगता है. 
  • पशु के मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. 
  • मुंहपका हो जाते हैं अंदर और बाहर फफोले हो जाते हैं. 
  • खासतौर पर पशु के जीभ-मसूड़ों पर फफोले हो जाते हैं. 
  • पशु के पैर में खुर के बीच वाली जगह में घाव हो जाते हैं. 
  • अगर पशु गाभिन है तो उसका गर्भपात हो जाता है. 
  • पशु के थन में सूजन आने से दूध देने में परेशानी होती है.
  • एफएमडी पशु में बांझपन की बीमारी की वजह भी है. 

ऐसे फैलता है एफएमडी     

  • बरसात के दौरान दूषित चारा और दूषित पानी पीने से. 
  • बरसात के दौरान खुले में चरने से भी फैलता है. 
  • खुले में पड़ी सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. 
  • फार्म पर आने वाला नया पशु पीडि़त है तो उससे लग जाती है. 
  • एफएमडी पीड़ित पशु के साथ रहने से हो जाती है. 

एफएमडी की रोकथाम के उपाय 

एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बहुत आसान तरीकों से पशुओं में एफएमडी की रोकथाम की जा सकती है. ये वो उपाय हैं जिसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. 

  • पशु पीडि़त हो या नहीं उसका रजिस्ट्रेशन कराएं. 
  • पशु की ईयर टैगिंग जरूर करवाएं. 
  • पशु को साल में दो बार एफएमडी का टीका लगवाएं. 
  • सभी सरकारी केन्द्र पर टीका फ्री लगाया जाता है. 
  • पशु के बैठने-खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

एफएमडी का ऐसे करें उपचार 

  • पीड़ित पशु को बाकी सभी हेल्दी पशुओं से अलग रखें. 
  • मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट से धोएं. 
  • बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर पशु के मुंह की सफाई करें. 
  • खुर के घावों को पोटेशियम या बेकिंग सोडा से धोएं. 
  • पशु के घावों पर कोई भी एंटीसेप्टिक क्रीम लगाते रहें.   

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

MORE NEWS

Read more!