Delhi Milk Scheme: क्या बंद हो जाएगी 67 साल पुरानी दिल्ली मिल्क स्कीम!, कोई चलाने को तैयार नहीं 

Delhi Milk Scheme: क्या बंद हो जाएगी 67 साल पुरानी दिल्ली मिल्क स्कीम!, कोई चलाने को तैयार नहीं 

Delhi Milk Scheme 67 साल से दिल्ली को दूध पिला रही दिल्ली मिल्क स्कीम (DMS) पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है. डीएमएस लगातार घाटे में जा रही है. घाटे का खुलासा हाल ही में संसद में रखी गई एक रिपोर्ट से हुआ है. हाल ही में दिल्ली के बीजेपी सांसद ने लोकसभा में डीएमएस का मुद्दा उठाया था. संसद में ही डीएमएस ने बताया है कि संचालन के लिए कोई प्राइवेट कंपनी नहीं मिल रही है. 

दूध बना ‘मौत का घूंट’!(Photo: Representational)दूध बना ‘मौत का घूंट’!(Photo: Representational)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 24, 2026,
  • Updated Mar 24, 2026, 12:08 PM IST

साल 1959 में एक डेयरी की शुरुआत की गई थी. नाम दिया गया था दिल्ली मिल्क स्कीम (DMS). ये केन्द्र सरकार द्वारा संचालित थी. मकसद था दिल्ली में आम जनता को दूध की सप्लाई करना. साथ ही दूध और दूध से बने प्रोडक्ट अस्पतालों, संसद भवन, सरकारी कैंटीनों, छात्रावासों और रक्षा संस्थानों में सप्लाई करना था. इसके लिए पड़ोसी राज्यों से दूध खरीदा जाता था. डीएमएस के दूध, दही और घी की इतनी डिमांड थी कि दिल्ली में एक वक्त डीएमएस के एक हजार से ज्यादा मिल्क बूथ थे. 

दिल्ली की प्राइम लोकेशन पर 100 एकड़ के करीब जमीन से डीएमएस संचालित हो रही थी. लेकिन बीते कुछ साल से डीएमएस का बुरा वक्त शुरू हो गया है. दूध प्रोसेसिंग की क्षमता कम होती जा रही है. बूथों की संख्या भी घट गई है. घाटा भी हजारों करोड़ में पहुंच गया है. सरकार ने डीएमएस को किसी प्राइवेट कंपनी को देने का मन बनाया था तो कोई इसे लेने को तैयार नहीं है. 

5 लाख लीटर दूध प्रोसेस होता था रोजाना 

केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मुताबिक डीएमएस में एक वक्त ये था कि 5 लाख लीटर दूध रोजाना प्रोसेस होता था. मिल्क पाउच के साथ-साथ दही और घी की सप्लाई की जाती थी. मिल्क बूथ के जरिए दिल्ली-एनसीआर में दूध की सप्लाई की जाती थी. हालांकि डीएमएस की शुरुआत दूध की प्रोसेसिंग और पैकिंग के लिए रोजाना 2.55 लाख लीटर दूध की क्षमता रखी गई थी.

लेकिन जैसे-जैसे डिमांड बढ़ती गई तो इसकी क्षमता भी बढ़ाई गई. और इसे बढ़ाकर 5 लाख लीटर तक पहुंचा गया था. डिमांड को पूरा करने के लिए दिल्ली के आसपास के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार से दूध खरीदा जाता था. ट्रेन के जरिए दूध दिल्ली पहुंचता था. लेकिन अब लगातार घाटे के चलते दिल्ली-एनसीआर में डीएमएस के करीब 380 ही बूथ बचे हैं. 

30 साल के कंट्रेक्ट पर देने की है तैयारी 

डीएमएस को अब केन्द्र सरकार खुद नहीं चलाएगी. इसके लिए उसने तैयारी शुरू कर दी है. बीते कुछ वक्त पहले डीएमएस ने टेंडर निकाला था. टेंडर डीएमएस को 30 साल के लिए कंट्रेक्ट पर देने के लिए था. लेकिन डीएमएस की ओर से मांगी गई रकम और उसकी शर्तों पर कोई भी कंपनी डीएमएस को लेने के लिए तैयार नहीं है. टेंडर निकलने के बाद भी कोई कंपनी इस प्रक्रि या में शामिल नहीं हुई. जबकि अकेले दिल्ली-एनसीआर में ही डीएमएस के पास प्राइम लोकेशन पर 100 एकड़ के करीब जमीन मौजूद है. 

धड़ल्ले से चल रहीं प्राइवेट डेयरी 

ऐसा नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ डीएमएस की दूध और दूध से बने प्रोडक्ट सप्लाई करती है. डीएमएस के अलावा कई बड़ी प्राइवेट कंपनी भी दिल्ली-एनसीआर में दूध की सप्लाई कर रही है. डेयरी के जानकारों की मानें तो ये प्राइवेट कंपनियां दिल्ली-एनसीआर में दूध ही सप्लाई नहीं कर रहीं, बल्कि दूध से बने अपने प्रोडक्ट भी धड़ल्ले से बेच रही हैं.

अमूल, मदर डेयरी, वीटा, वेरका के मिल्क पार्लर दिल्ली में देखे जा सकते हैं. इतना ही नहीं हाल ही में राजस्थान की सरस डेयरी ने भी ऐलान किया है कि वो दिल्ली-एनसीआर में अपने मिल्क पार्लर खोलने जा रही है. इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है.  

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