
ईरान-अमेरिका और इजरायल की लड़ाई चल रही है. लड़ाई के साथ ही भविष्य के लिए तेल और गैस की कमी पर भी चर्चा हो रही है. अगर कहीं हालात ऐसे बने कि तेल-गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा तो तब क्या होगा. सुबह-सवेरे दूध कैसे मिलेगा. गाडि़यां घर-घर दूध कैसे पहुंचाएंगी. ये कोई पहला मौका नहीं है जो दूध की सप्लाई को लेकर फिक्र जताई जा रही है. अक्सर जब देश में इमरजेंसी जैसे हालात होते हैं या किसी प्राकृतिक आपदा के बारे में बात की जाती है तो दूध सप्लाई को लेकर बात जरूर होती है. देश में ऐसे ही विपरीत हालात से निपटने के लिए केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) देश की छोटी-बड़ी डेयरियों बैठक करते हैं.
बैठक में इमरजेंसी प्लान की तैयारियों पर चर्चा होती है. देश में दूध-मक्खन का स्टॉक जांचा जाता है. अगर कहीं थोड़ी बहुत कमी नजर आती है तो उसे दो-चार दिन में पूरा करने का काम किया जाता है. लेकिन किसी भी हाल में दूध की सप्लाई बाधित नहीं होने दी जाती है. क्योंकि इमरजेंसी किसी भी वजह से घोषित की जाए उसका असर देश की बहुत सारी सुविधाओं और कारोबार पर पड़ता है. और सबसे पहले ट्रांसपोर्टशन ज्यादा और जल्दी प्रभावित होता है.
डेयरी एक्सपर्ट डॉ. गिरधारी वर्मा ने किसान तक को बताया कि इमरजेंसी के हालात में डेयरी के सभी सेंटर को अलर्ट कर दिया जाता है. सबसे पहले सेंटर पर मिल्क पाउडर की सप्लाई की जाती है. हर एक सेंटर पर तीन से चार टन मिल्क पाउडर रखा जाता है. ये पाउडर आम शहरियों खासतौर से बच्चों और बुर्जुगों के काम आता है. वहीं मक्खन का भी पूरा स्टॉक रखा जाता है. जिससे शहर में सप्लाई और फौज के लिए जितना मांगा जाता है तो डेयरी सप्लाई करने को तैयार रहती है. सरकार जब, जहां दूध-मक्खन पहुंचाने के लिए कहती है वहीं डेयरी यूनिट सप्लाई देती हैं.
डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो इमरजेंसी प्लान को देखते हुए देश में हर वक्त वक्त 70 से 80 हजार टन मक्खन मौजूद रहता है. इमरजेंसी के लिए 80 हजार टन की जरूरत होती है. स्टॉक और जरूरत के अंतर को दो से चार दिन में पूरा कर लिया जाता है. अब अगर दूध की बात करें तो उसकी डिमांड को पूरा करने के लिए 1.5 लाख टन मिल्क पाउडर चाहिए होता है. जबकि बाजार के कुछ कारणों के चलते देश में हर वक्त दो से 2.5 लाख टन मौजूद रहता है.
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