
देश में दूध की कोई कमी नहीं है, हर साल दूध उत्पादन बढ़ रहा है. साल 2025 में दूध उत्पादन 25 करोड़ टन पर पहुंच गया है. डेयरी एक्सपर्ट का दावा है कि हमारे देश में पशुपालन का इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा है कि जरूरत के मुताबिक कभी भी दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. और पशु दूध उत्पादन बढ़ाने की तैयारी तो चल ही रही है. लेकिन इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि दूध की डिमांड बढ़े. पशुपालन में लगे परिवारों का मुनाफा बढ़े. और ये सब दूध बेचकर मुमकिन नहीं होगा.
इसके लिए जरूरी है कि दूध संग दही, घी-मक्खन भी बेचा जाए. बाजार में सिर्फ दूध बेचने से काम नहीं चलेगा. दूध की प्रोसेसिंग कर उसके प्रोडक्ट बनाने होंगे. तैयार प्रोडक्ट को लोकल ब्रांड बनाना होगा. ऐसा करने से जहां दूध की डिमांड बढ़ेगी वहीं पशुपालक का मुनाफा भी बढ़ेगा. आज लोगों को प्रोटीन की जरूरत है. वेजिटेरियन प्रोटीन का नाम आते ही डेयरी प्रोडक्ट की तरफ देखते हैं. इसका एक बड़ा फायदा ये भी होगा कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
भारत का संगठित डेयरी सेक्टर नए बाजारों की तलाश में लग गया है. कंपनी छोटी हो या बड़ी सभी दूध से बने अलग-अलग प्रोडक्ट लाकर अपने बाजार को मजबूत करने में लगे हुए हैं. उनका मानना है कि इसी से मुनाफा बढ़ेगा. क्योंकि सिर्फ दूध बेचकर बाजार में एंट्री की जा सकती है, लेकिन बड़ा मुनाफा सिर्फ डेयरी प्रोडक्ट से ही आता है.
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