
मॉनसून आ चुका है. देश के कई इलाकों में खूब जमकर बारिश हो रही है. अब आने वाले कुछ दिन बाद हरा चारा खूब दिखाई देगा. इन दिनों में इतना हरा चारा होता है कि पशुओं को खिलाने के बाद भी खूब बचता है. तीन-चार हरे चारे ऐसे भी हैं जिनकी कटाई चल रही है. पशुओं के लिए बड़ी मात्रा में हरा चारा मौजूद है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो ऐसे में सर्दियों के लिए अभी से हरे चारे की तैयारी की जा सकती है. मौजूदा हरे चारे का साइलेज बनाया जा सकता है.
इस साइलेज से सर्दियों में पशुओं के लिए हरे चारे की कोई कमी नहीं होगी. ऐसा करके अगस्त-सितम्बर के लिए भी हरा चारा स्टोर किया जा सकता है. चारा एक्सपर्ट के मुताबिक बरसीम, ओट और चरी पतले तने वाली चारे की फसल को सुखाकर आसानी से साइलेज बनाया जा सकता है. गौरतलब रहे हरे चारे की कमी से निपटने के लिए ही मार्च के दौरान हरे चारे की बुवाई कर दी जाती है.
फोडर साइंटिस्ट का कहना है कि किसान चारे की फसल के बीज बेचकर भी अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं. अगर बरसीम, जई और रिजका की फसल से बीज उत्पादन किया जाए तो अच्छी इनकम होगी. वहीं उनका कहना है कि खासतौर पर गर्मियों में हरे चारे की बेहद कमी हो जाती है. इसलिए मई-जून में पशुओं के लिए हरे चारे की कोई कमी ना रहे इसके लिए मार्च में ही चारे की बुवाई शुरू कर दें.
खासतौर पर ज्वार, बाजरा, लोबिया और मक्का की बुवाई कर अच्छा पौष्टिक चारा लिया जा सकता है. मार्च में बुवाई करने से मई में फसल काटी जा सकती है. किसानों को खासतौर पर हरे चारे के बारे में ये सलाह कृषि विज्ञान केंद्र, सदलपुर और गांव ढाणा कलां में किसान गोष्ठी के मौके पर दी गई. इस मौके पर 100 से ज्यादा किसान मौजूद थे.
चारा एक्सपर्ट ने बताया कि घर पर भी हरे चारे से हे और साइलेज बड़ी ही आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन जरूरत है बस थोड़ी सी जागरुकता की. जैसे पतले तने वाले चारे की फसल को पकने से पहले ही काट लें. उसके बाद तले के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए. हे और साइलेज के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें.
क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है. यानि चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हें अच्छी तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
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