
मध्यप्रदेश सरकार की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है.इस योजना का लाभ लेकर सिवनी जिले के मझौली विकासखंड के रानीताल कटाव निवासी 25 वर्षीय रोबिन्स झारिया ने डेयरी व्यवसाय में सफलता की नई कहानी लिखी है.सरकारी सहायता, बैंक ऋण और सब्सिडी के सहारे शुरू किए गए उनके डेयरी कारोबार से आज उन्हें हर महीने 60 से 75 हजार रुपये तक की आय हो रही है.
करीब एक वर्ष पहले रोबिन्स झारिया ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मझौली शाखा के माध्यम से योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया.इस राशि से उन्होंने 10 गिर नस्ल की गायें खरीदीं, आधुनिक डेयरी शेड का निर्माण कराया और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी यूनिट की स्थापना की.आज उनकी डेयरी इकाई व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही है और यह आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है.
रोबिन्स बताते हैं कि उनके साथ सुजीत झारिया, सौरभ कोष्टा और अनुज कोष्टा भी डेयरी संचालन में सहयोग करते हैं. प्रतिदिन 50 से 60 लीटर दूध की बिक्री होती है, जिससे उन्हें 2,000 से 2,500 रुपये की दैनिक आय प्राप्त होती है. इसी के आधार पर उनकी मासिक आमदनी 60 हजार से 75 हजार रुपये तक पहुंच गई है.
योजना के तहत रोबिन्स को 33 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) का लाभ मिला.बैंक ऋण की लगभग 13 हजार रुपये मासिक किश्त जमा करनी होती है.डेयरी संचालन में होने वाले कुल खर्च का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पशुओं के चारे और देखभाल पर खर्च होता है.
हालांकि, उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि होने के कारण अधिकांश हरा चारा स्वयं के खेतों से उपलब्ध हो जाता है, जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है.
रोबिन्स के अनुसार उन्हें इस योजना की जानकारी स्थानीय पशु चिकित्सालय से मिली थी.सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिलने के बाद उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुके हैं.
वे कहते हैं कि जिस सफलता की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, वह सरकार की इस योजना की बदौलत संभव हो सकी. इसके लिए उन्होंने मध्यप्रदेश शासन, पशुपालन विभाग और बैंक का आभार व्यक्त किया.
मध्यप्रदेश सरकार की इस योजना का उद्देश्य राज्य में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाना तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है.
रोबिन्स झारिया की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ लिया जाए, तो कम समय में डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाया जा सकता है. उनकी सफलता से क्षेत्र के अन्य युवा भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं.