
जैसे-जैसे जून बीतने को आ रहा है तो वैसे ही अल नीनो का डर भी बढ़ता जा रहा है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि जून के आखिर से अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट की मानें तो अल नीनो के चलते बारिश कम होगी और गर्मी ज्यादा तेज हो जाएगी. यही डर पशुपालकों को सता रहा है. उनका डर है कि ऐेसे में पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम कैसे किया जाएगा. क्योंकि मई-जून में तो वैसे ही हरे चारे की कमी हो जाती है. जबकि बीते लंबे वक्त से हरे चारे की कमी और उसके महंगे होने की परेशानी भी बनी हुई है.
हालांकि एक्सपर्ट इस परेशानी से बचने के लिए साइलेज बनाने की सलाह देते हैं. उनका दावा है कि इस परेशानी से पशुपालकों को सिर्फ साइलेज ही बचा सकता है. क्योंकि अभी बाजार में तीन से चार तरह का हरा चारा मौजूद है. इसे पशुओं को खिलाने के साथ ही साइलेज के रूप में स्टोर करके भी रखा जा सकता है. वहीं बहुवर्षीय घास का हे बनाकर भी स्टोर किया जा सकता है.
चारा एक्सपर्ट सलाह दे रहे हैं कि अल नीनो के चलते होने वाली परेशानी से निपटने के साथ ही चार पैसे भी कमाए जा सकते हैं. जैसे किसान चारे की फसल के बीज बेचकर भी अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं. अगर बरसीम, जई और रिजका की फसल से बीज उत्पादन किया जाए तो अच्छी इनकम होगी. वहीं उनका कहना है कि खासतौर पर गर्मियों में हरे चारे की बेहद कमी हो जाती है. इसलिए मई-जून में पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में ये तीन फसल मिल जाती हैं.
इसी को देखते हुए मार्च में ही चारे की बुवाई शुरू कर दी जाती है. खासतौर पर ज्वार, बाजरा, लोबिया और मक्का की बुवाई कर अच्छा पौष्टिक चारा लिया जा सकता है. मार्च में बुवाई करने से मई में फसल काटी जा सकती है. किसानों को खासतौर पर हरे चारे के बारे में ये सलाह कृषि विज्ञान केंद्र, सदलपुर और गांव ढाणा कलां में किसान गोष्ठी के मौके पर दी गई. इस मौके पर 100 से ज्यादा किसान मौजूद थे.
एक्सपर्ट का कहना है कि घर पर भी हरे चारे से हे और साइलेज बड़ी ही आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन जरूरत है बस थोड़ी सी जागरुकता की. जैसे पतले तने वाले चारे की फसल को पकने से पहले ही काट लें. उसके बाद तले के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए.
हे और साइलेज के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें. क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है. यानि चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हेंय अच्छी तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
ये भी पढ़ें:
Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन
EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!