Fish Pond Care: इस मौसम में भी नहीं होंगी बीमार, खूब होगी ग्रोथ, मछलियों के तालाब में करें ये उपाय 

Fish Pond Care: इस मौसम में भी नहीं होंगी बीमार, खूब होगी ग्रोथ, मछलियों के तालाब में करें ये उपाय 

Fish Pond Care अप्रैल से बढ़ते तापमान में होता ये है कि मछलियों के तालाब का पानी तेज गर्म होने से उसमे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है. ऑक्सीजन की कमी के चलते बड़ी संख्या में मछलियां मर जाती हैं. ऐसे में यूपी, मध्य‍ प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मछली पालकों को खासा नुकसान उठाना पड़ता है जहां गर्मी ज्यादा पड़ती है. 

ठंड से मछलियां हो सकती हैं बीमारठंड से मछलियां हो सकती हैं बीमार
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 06, 2026,
  • Updated Apr 06, 2026, 9:10 AM IST

मौसम पूरी तरह से बदल रहा है. बदलता मौसम इंसान ही नहीं जीव-जन्तुओं के लिए भी नुकसानदायक होता है. उस पर बीच-बीच में हल्की बारिश भी हो रही है. इसके चलते भी खासतौर से मछलियों के तालाब के पानी की सेहत बिगड़ने लगती है. अप्रैल चल रहा है तो खासतौर पर दोपहर के वक्त तालाब के पानी में बहुत सारे बदलाव होते हैं. क्योंकि दिन के वक्त तापमान भी धीरे-धीरे ऊपर की ओर खि‍सक रहा है. मछली पालकों को ऐसे में अलर्ट रहने की जरूरत है. क्योंकि अप्रैल के आखि‍र और मई-जून के दौरान तालाब का पानी चाय उबालने जैसा हो जाता है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो मछलियों के तालाब के पानी का तापमान 30-31 डिग्री से ऊपर हो गया है तो ये मछलियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. 

एक्सपर्ट भी गर्मियों में मछलियों के तालाब को लेकर एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. मछलियों की खुराक, तालाब के पानी का तापमान, पानी का लेवल और तालाब की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देने की टिप्स दी जाती हैं. साथ ही रोजाना की देखभाल कैसी हो इसके बारे में भी जानकारी दी जाती है.  

ऐसे रखें तालाब के पानी का ख्याल 

फिशरीज एक्सपर्ट महीपाल सिंह का कहना है कि उत्तर भारत के तालाबों में ज्यादातर रोहू, कतला, मृंगाल मछली का पालन किया जाता है. गर्मी के इस मौसम में मछलियों को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तापमान बढ़ रहा है. आने वाले 15-20 दिन बाद तापमान 40 से 42 डिग्री तक तापमान पहुंच जाएगा. यह मछलियों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है.

जब गर्म हवाएं चलती हैं तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. होता ये है कि तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. अब क्योंकि मछली पालन के लिए बिजली कमर्शियल होने के चलते बहुत महंगी है तो मछली पालक तालाब में पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं. 

मछलियों के तालाब में जरूर करें ये काम 

  • दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तालाब में पंखे और इरेटर चलाएं. 
  • गर्मियों में मछलियों को सूखा खाने को न दें. 
  • एक लीटर मीठे फ्रेश पानी में 100 ग्राम गुड़ घोलकर दें.
  • पानी में दो से तीन ग्राम विटामिन सी घोलकर दें. 
  • ग्लूकोज पाउडर भी घोलकर पिलाया जा सकता है. 
  • मछलियों को दी जाने वाली दोपहर की खुराक कम कर दें. 
  • सुबह-शाम और रात 30-30 फीसद तक खाने को दें. 
  • तालाब के पानी की हाईट बढ़ा दें. 
  • तालाब में 3.5 फुट पानी है तो उसे पांच से 5.5 फुट कर दें. 
  • ऊपर का पानी गर्म भी हो जाएगा तो 3.5 फुट पानी की सतह सामान्य बनी रहेगी.  

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