Save Camel: इसलिए कम हो रही है देश में ऊंटों की संख्या, राजस्थान सरकार ने बताई वजह 

Save Camel: इसलिए कम हो रही है देश में ऊंटों की संख्या, राजस्थान सरकार ने बताई वजह 

Save Camel India ऊंटों की कम हो रही संख्या वाकई में बहुत परेशान करने वाली बात है. देशभर की बात करें तो ऊंटों की संख्या में 37 फीसद की कमी आई है. राजस्थान के के इतिहास में अपनी गौरव गाथा दर्ज कराने वाले इस राज्य पशु को मौजूदा वक्त में संरक्षण की बहुत जरूरत है. वर्ना एक दिन रेगिस्तान का ये जहाज बीते वक्त की कहानी बनकर रह जाएगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 21, 2026,
  • Updated Jan 21, 2026, 12:54 PM IST

20वीं पशुगणना के मुताबिक ऊंटों की संख्या घट रही है. 21वीं पशुगणना के ताजा आंकड़े आने वाले हैं. लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री का बयान भी बताता है कि राजस्थान में ऊंटों की संख्या तेजी से घट रही है. यही वजह है कि ऊंटों की कम होती संख्या बड़ी परेशानी बनती जा रही है. ऐसा नहीं है कि ऊंटों की संख्या सिर्फ राजस्थान में ही कम हो रही है. हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत जहां भी ऊंट हैं वहां उनकी संख्या में गिरावट आ रही है. रेगिस्तान का जहाज के नाम से पहचान बनाने वाले ऊंट अब बहुत ही कम रह गए हैं. 

हालांकि सबसे ज्यादा ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं. इसीलिए ऊंट को राजस्थान में राज्य पशु घोषि‍त किया गया था. लेकिन अब राजस्थान समेत देखभर में ऊंटों की संख्या गिर रही है. गौरतलब रहे राजस्थान सरकार ने अपने एक साल पूरे होने के मौके पर भी ऊंटों की संख्या कम होने पर परेशानी जाहिर की थी.

ये दो काम बंद होने से कम हो गए ऊंट 

राजस्थान के पशुपालन विभाग का कहना है कि कुछ वक्त पहले तक खासतौर पर पश्चि्मी राजस्थान के इलाकों में ऊंटों का बहुत महत्व था. वहां कृषि‍ और ट्रांसपोर्ट के लिए ऊंट का बहुत इस्तेमाल होता था. खेती से जुड़ा हर छोटा-बड़ा काम ऊंट की मदद से किया जाता था. इसी तरह से माल ढुलाई हो या फिर सवारी के रूप में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाना हो, उसके लिए भी ऊंट गाड़ी या फिर सीधे ही ऊंट पर बैठकर सफर किया जाता था. लेकिन अब दोनों ही क्षेत्रों में हुई हाईटेक तरक्की के चलते ऊंटों का इस्तेमाल कम हो गया है. 

ऊंट बचाने के लिए सुझाव दे रही सरकार

सरकार का कहना है कि मरू प्रदेश के गौरव राज्य पशु ऊंटों की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य में ऊष्ट्र संरक्षण एवं विकास मिशन के तहत ऊंटों के प्रजनन को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए पशुपालन निदेशालय में अलग से एक मिशन का गठन किया गया है. इस मिशन के तहत ही और दूसरे काम भी किए जा रहे हैं. उनमे शामिल कार्यों में-

  • ऊंटों के रोग निदान और उपचार शिविरों का आयोजन करना.  
  • ऊंट बाहुल्य क्षेत्रों में ऊष्ट्र वंशीय पशु प्रतियोगिताओं का आयोजन. 
  • ऊंटों के उत्पादों का विपणन कर ऊष्ट्र पालकों की आर्थिक स्थिति सुधारना.
  • ऊंटों को पर्यटन के साथ जोड़कर पर्यटकों को लुभाना. 
  • ऊंटों के लिए अभ्यारण्य और पुनर्वास केंद्र बनवाना. 
  • ऊष्ट्र संरक्षण योजना के तहत ब्रीडिंग पॉलिसी के बढ़ावा देना. 
  • ऊंटों के संरक्षण और नवजात टोडियों के पालन-पोषण के लिए सहायता देना.
  • ऊंट पालकों को दी जाने वाली सहायता राशि‍ 10 से 20 हजार की गई.

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