
खासतौर पर कोरोना के बाद से फूड आइटम के बाजार की तस्वीर बदल गई है. अब बात खासतौर पर टेस्ट, न्यूट्रिशन और बजट में आने वाले प्रोडक्ट की होती है. यही वजह है कि फूड सेक्टर के 38 फीसद ग्राहक छोटे शहर और गांव-कस्बों से हैं. फूड सेक्टर के एक्सपर्ट की मानें तो आज बाजार में नेशनल से ज्यादा सिटी और रीजनल ब्रांड पसंद किए जा रहे हैं. ऐसे ब्रांड जिसके प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग लोकल लेवल पर हुई हो. यही वजह है कि आज दूध पोल्ट्री और फिशरीज का उत्पादन फल-सब्जी के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है.
अमूल के पूर्व एमडी और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि आज बाजार में बिकने वाले फूड आइटम की बात करें तो ग्राहक को ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन, फैट और एनिमल सोर्स वाला प्रोडक्ट चाहिए. ये वो वर्ग है जो बाजार में मौजूद खाने-पीने की चीजों के कारोबारी पैटर्न को ही बदल दे रहा है. करीब 1.60 लाख करोड़ का निवेश भी फूड सेक्टर में होने की उम्मीद जताई जा रही है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि फूड सेक्टर जैसे पोल्ट्री, डेयरी और फिशरीज सेक्टर के प्रोडक्ट का 38 फीसद ग्राहक छोटे शहर और गांव-कस्बों का है. जिससे पता चलता है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां सिर्फ शहरी ब्रांड नहीं हैं. डॉ. सोढी का कहना है कि बाजार में आज नेशनल से ज्यादा सिटी और रीजनल ब्रांड पसंद किए जा रहे हैं. ऐसे ब्रांड जिसके प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग स्थानीय स्तर पर ही हुई है. ग्राहकों की इस सोच ने नेशनल ब्रांड बनी कंपनियों की परेशानी को बढ़ा दिया है.
बाजार में एक ट्रेंड आज भी कायम है और आने वाले वक्त में भी रहेगा, और वो है टेस्ट, न्यूट्रिशन और बजट में आने वाला प्रोडक्ट. आज दूध का उत्पादन 10 गुना, पोल्ट्री का 23 गुना, फिशरीज का 12 गुना और फल-सब्जी का 5.5 गुना उत्पादन बढ़ चुका है. इसलिए किसानों को उसका उत्पादन बढ़ाना चाहिए जिसकी बाजार में डिमांड हो. ब्रांड और पैकिंग ऐसे प्रोडक्ट के लिए सोने पर सुहागा साबित होते हैं. क्योंकि बाजार की स्टाडी बताती है कि आज देश के गांवों तक में पैक्ड फूड और ब्रांड पर बात हो रही है.
आरएस सोढ़ी ने बताया कि आज फल-सब्जी से ज्यादा दूध और लाइव स्टॉक का उत्पादन बढ़ रहा है. अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो दूध का उत्पादन 10 गुना, पोल्ट्री का 23 गुना, फिशरीज का 12 गुना और फल-सब्जी का 5.5 गुना उत्पादन बढ़ चुका है. 50 साल पहले दूध् का उत्पादन 24 मिलियन टन था. जबकि आज 231 मिलियन टन पर पहुंच चुका है. अगर हम आंकड़े देखें तो हर 25 साल में दूध का उत्पादन तीन गुना हो जाता है.
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