अपनाएं FMD की पहचान और रोकथाम के उपाय, नहीं घटेगा गाय-भैंस का दूध 

अपनाएं FMD की पहचान और रोकथाम के उपाय, नहीं घटेगा गाय-भैंस का दूध 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी की शुरुआत में ही इसकी रोकथाम कर ली जाए तो डबल नुकसान से बचा जा सकता है. इसके लिए जरूरी ये है कि हम एफएमडी के लक्षणों को पहचान सकें और पहचान के साथ ही कुछ जरूरी उपाय भी कर लें. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 02, 2026,
  • Updated Sep 02, 2026, 6:07 PM IST

खुरपका-मुंहपका (FMD) गाय-भैंस की जानलेवा बीमारी है. इस बीमारी के चलते पशुओं की जान पर बन आती है तो पशुपालकों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. ये संक्रमण से होने वाली बीमारी है. वहीं बारिश के दौरान ये तेजी से फैलती है. ये बीमारी ऐसे पशुओं को होती है जिनके खुर होते हैं और खुर के बीच में जगह होती है. एफएमडी बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी है कि हमे उसके लक्षण पता हों. साथ ही उसके फैलने की वजह पता हों जिससे उन्हें कंट्रोल किया जा सके. 

साथ ही अगर किसी पशु को ये बीमारी हो जाए तो उस वक्त क्या करना चाहिए इस बात की जानकारी भी होना बहुत जरूरी है. क्योंकि वक्त रहते लक्षण पता चल जाएं और कुछ उपाय अपना लिए जाएं तो फिर इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है. वहीं ऐसा करने से गाय की जान भी नहीं जाएगी. और पशुपालक दोहरे नुकसान से भी बच जाएगा. 

एफएमडी के लक्षण 

एनिमल साइंटिस्ट, सीआईआरबी डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि एफएमडी दुधारू पशु गाय-भैंस, भेड़-बकरी में तो होती है साथ में घोड़े जैसे पशुओं में भी होती है. इसीलिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है. क्योंकि जैसे ही आप लक्षण पहचान लेंगे तो उसे फैलने से रोकने के लिए जरूरी उपाय भी अपना लेंगे. 

एफएमडी की रोकथाम के उपाय 

  • डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि बहुत आसान तरीकों से पशुओं में एफएमडी की रोकथाम की जा सकती है. ये वो उपाय हैं जिसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. 
  • पशु पीडि़त हो या नहीं उसका रजिस्ट्रेशन कराएं. 
  • पशु की ईयर टैगिंग जरूर करवाएं. 
  • पशु को साल में दो बार एफएमडी का टीका लगवाएं. 
  • सभी सरकारी केन्द्र पर टीका फ्री लगाया जाता है. 
  • पशु के बैठने-खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

एफएमडी के उपचार का तरीका 

  • पीड़ित पशु को बाकी सभी हेल्दी पशुओं से अलग रखें. 
  • मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट से धोएं. 
  • बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर पशु के मुंह की सफाई करें. 
  • खुर के घावों को पोटेशियम या बेकिंग सोडा से धोएं. 
  • पशु के घावों पर कोई भी एंटीसेप्टिक क्रीम लगाते रहें.   

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