Fish Feed: तालाब में फीड डालने के ये तीन तरीकों से बढ़ेगी मछलियों की ग्रोथ  

Fish Feed: तालाब में फीड डालने के ये तीन तरीकों से बढ़ेगी मछलियों की ग्रोथ  

Fish Feed फिशरीज एक्सपर्ट अगर तीन तरह से मछलियों को फीड खि‍लाने की सलाह देते हैं तो उसके पीछे बड़ी वजह है. उसके एक नहीं कई फायदे हैं. इसके लिए वो मछलियों को फीड खि‍लाने में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. अगर तालाब बड़ा है तो मछलियों को ड्रोन से फीड खि‍लाने की बात कही जाती है. क्योंकि बड़े तालाबों में हाथ से फीड हर जगह नहीं पहुंच पाता है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 02, 2026,
  • Updated Sep 02, 2026, 3:11 PM IST

मछलियों के एक ही तालाब में रोजा एक जैसा ही फीड डाला जाता है. पूरे तालाब में और दूसरे उपाय भी एक जैसे ही अपनाए जाते हैं. बावजूद इसके जब तालाब की मछलियों को बेचने के लिए बाहर निकाला जाता है तो वो अलग-अलग वजन और साइज में नजर आती हैं. ऐसे में मछली पालकों का एक ही सवाल होता है कि जब सभी मछलियों की देखभाल एक जैसी की और फीड भी एक जैसा ही खि‍लाया तो फिर कोई मछली मोटी हो गई और कोई पतली कैसे रह गई. अब अगर बाजार के अर्थशास्त्र पर बात करें तो जो मछली जितनी मोटी और वजनी होगी उसका उतना ही अच्छा दाम मिलेगा. 

कम वजन वाली मछलियों के तो औने-पौने दाम ही मिलते हैं. ये परेशानी किसी एक मछली पालक की नहीं है. ज्यादातर मछली पालक इसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं. क्योंकि जब मछली पालक तालाब में फीड डालते हैं तो वो सही तरीके से मछलियों तक नहीं पहुंच पाता है. यही वजह है कि कुछ मछलियां तो भरपेट दाना खा लेती हैं, जबकि कुछ मछलियों को पूरा दाना नहीं मिल पाता है और वो भूखी रह जाती हैं.

तालाब के बीच में चाहिए फीड   

फिशरीज एक्सपर्ट एसके खान का कहना है कि बाजार में रोहू मछली बहुत पसंद की जाती है. इसके मीट में बहुत स्वा द होता है. इसका मीट नरम भी होता है. यूपी, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थाेन में रोहू की डिमांड पूरी करने के लिए तालाबों में रोहू मछली खूब पाली जाती है. जब तालाब में मछलियों के लिए दाना डाला जाता है तो रोहू तालाब की तली से दो फुट ऊपर और तालाब की सतह से दो फुट नीचे बीच में आकर दाना खाती है. 

ये तालाब की तली में खाती है फीड  

नरेन मछली को नॉर्थ इंडिया में नैनी के नाम से भी जाना जाता है. पेट भरने के लिए नैनी तालाब के तले में रहकर ही इंतजार करती है. बेशक मछली पालक दाना डालने में कितनी ही देर कर दे, लेकिन नैनी तालाब की सतह पर जाकर दाने की तलाश नहीं करती है. वैसे भी नैनी को तालाब की तली में ही रहना ज्याबदा पसंद है. 

कतला सतह पर खाती है फीड 

नॉर्थ इंडिया में रोहू के बाद खाने के लिए अगर किसी और मछली को पसंद किया जाता है तो वो कतला है. फिश फ्राई में भी कतला मछली का खासा चलन है. बाजार में एक से डेढ़ किलो वजन की कतला मछली हाथों-हाथ बिकती है. लेकिन अपना पेट भरने के लिए कतला तालाब की सतह पर ही रहकर इंतंजार करती है.  

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