
दूध उत्पादन में नंबर वन होने के बाद भी अगर हम डेयरी एक्सपोर्ट में पीछे हैं तो उसकी एक बड़ी वजह है खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी. एफएमडी खुर वाले पशुओं की जानलेवा बीमारी है. ये बीमारी उन पशुओं को होती है जिनके खुर होते हैं और खुर के बीच में जगह होती है. दुनिया के ज्यादातर देश इस बीमारी से परेशान हैं. इस बीमारी से पीडि़त पशु के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से इंसानों में भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए डेयरी प्रोडक्ट इंपोर्ट करने वाले देश इसे लेकर अलर्ट रहते हैं.
भारत का डेयरी प्रोडक्ट भी इससे प्रभावित हो रहा है. नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह की मानें तो देश एफएमडी को कंट्रोल करने के करीब है. जल्द ही वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एनिमल हेल्थ (WOAH) को प्रस्ताव भेजा जाएगा. एनडीडीबी एनिमल हसबेंडरी मंत्रालय के साथ मिलकर शुरुआत में 9 राज्यों को एफएमडी फ्री जोन बनाने पर काम कर रहा है.
बीते कुछ वक्त पहले दिल्ली में पशुओं के टीकाकरण को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में ही जानकारी दी गई थी कि सीरो-सर्विलांस के आधार पर कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात को एफएमडी फ्री जोन बनाने का आकलन किया गया है. इसी के चलते एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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