
देश में घी-मक्खन का बड़ा बाजार है. घी-मक्खन डेयरी के खास प्रोडक्ट में शामिल हैं. ये कहना भी गलत नहीं होगा कि घी-मक्खन हमारी संस्कृति का भी हिस्सा रहे हैं. यूपी का ब्रज क्षेत्र तो दूध-दही, घी के लिए ही जाना जाता है. अगर आज की बात करें तो कुछ देश ऐसे हैं जहां भारतीय घी-मक्खन को ही पसंद किया जाता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो देश में भैंसों की चार नस्ल ऐसी हैं जिनके दूध को घी-मक्खन बनाने में बहुत अच्छा माना जाता है.
उसकी बड़ी वजह है दूध में फैट की अच्छी मात्रा का होना. यही वजह है कि घी-मक्खन बनाने में इनका दूध पहले इस्तेमाल किया जाता है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो दूध में जितनी ज्यादा मात्रा फैट की होगी तो घी-मक्खन उतना ही अच्छा बनेगा. वहीं एक्सपर्ट के मुताबिक देश में घी और मक्खन का करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का कारोबार है.
भदावरी भैंस के दूध को फैट के मामले में नंबर वन माना जाता है. भदावरी भैंस यूपी में आगरा-इटावा और मध्य प्रदेश में भिड और मुरैना में पाई जाती है. इसके रंग के चलते भदावरी को भूरी भैंस भी कहा जाता है. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक भदावरी भैंस के दूध में 8 से 13 फीसद तक फैट पाया जाता है. एक सरकारी विभाग की ओर से हुई रिसर्च में भी भदावरी भैंस के दूध में सबसे ज्यादा फैट होने की बात कही गई है.
दूध में फैट के मामले में भदावरी भैंस के बाद दूसरा नंबर जाफराबादी भैंस का आता है. जाफराबाद भैंस मूल रूप से गुजरात में पाई जाती हैं. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक जाफराबादी भैंस के दूध में 7 से 9 फीसद तक फैट पाया जाता है. पालन में जाफराबादी भैंस को भी खूब पसंद किया जाता है.
मुर्रा नस्ल की भैंस से हर कोई वाकिफ है. मुर्रा भैंस देश में सबसे ज्यादा हरियाणा और यूपी में हैं, लेकिन आज कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु आदि बहुत सारे राज्यों में मुर्रा पाली जा रही हैं. मुर्रा के दूध को भी फैट के मामले में बहुत अच्छा माना जाता है. डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्रा के दूध में 7 से 8 फीसद फैट पाया जाता है.
नीली रावी नस्ल की भैंस का मूल स्थान तो पाकिस्तान में है, लेकिन भारत के पंजाब में इसे बड़ी संख्या में पाला जाता है. हरियाणा में भी नीली रावी की बहुत डिमांड रहती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि नीली रावी के दूध में 6 से 8 फीसद तक फैट होता है.
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