गाय-भैंस जब गर्भवती होती है तो सभी पशुपालक दो चीजों को लेकर बहुत ज्यादा खुश रहते हैं. एक पशुओं के बाड़े में नया मेहमान आएगा और दूसरा ये कि बच्चा देने के बाद गाय-भैंस भरपूर दूध देना शुरू कर देगी. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि इसमे से कोई एक काम बिगड़ जाता है या कभी-कभी दोनों ही ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाती हैं. हालांकि ऐसे मौके पर नुकसान से बचने के लिए एनिमल एक्सपर्ट कुछ खास सलाह देते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे तो पशुओं के गर्भधारण करते ही उनकी खुराक से लेकर देखभाल का अच्छी तरह से ख्याल रखना चाहिए. लेकिन जब बच्चा होने वाला हो तो खासतौर पर 24 घंटे पहले पूरी तरह से अलर्ट हो जाना चाहिए.
और ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है. गाय-भैंस जब बच्चा देने वाली होती है तो कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं. जब गाय-भैंस में ये लक्षण दिखाने लगे तो पशुपालक को तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. क्योंकि जन्म के समय हुई छोटी सी लापरवाही भी बच्चे पर भारी पड़ती है और उसकी मौत तक हो जाती है. हालांकि 24 घंटे की देखभाल इस खतरे को बहुत हद तक कम और खत्म कर देती है. एक्सपर्ट का भी पूरा जोर इस बात पर रहता है कि पशुपालन में बच्चों की मृत्यु दर कम से कम हो. क्योंकि रिप्रोडक्शन (प्रजनन) और दूध उत्पादन से ही पशुपालक को मुनाफा होता है.
बच्चे को गाय-भैंस के सामने ही रखें
- जन्म के बाद बच्चे को ज्यादा से ज्यादा वक्त भैंस के सामने रखें.
- बच्चा सामने हो तो भैंस उसे चाटकर साफ करती है.
- बच्चे को चाटने से बच्चे की त्वचा जल्दी सूख जाती है.
- भैंस बच्चे को चाटती है तो इससे बच्चे का तापमान नहीं गिरता है.
- चाटने से बच्चे का शरीर साफ हो जाता है खून दौड़ने लगता है.
- बच्चे को चाटने से भैंस को सॉल्ट और प्रोटीन मिलता है.
जन्म के साथ ही बच्चे के साथ करें ये काम
- भैंस अगर बच्चे को नहीं चाटे तो उसे साफ तौलिए से रगड़ कर साफ कर दें.
- जन्म के फौरन बाद बच्चे के ऊपर से जेर-झिल्ली हटा दें.
- बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो तो उसकी छाती की मालिश कर दें.
- ठीक से सांस ना आने पर बच्चे की पिछली टांगें पकड़ कर उल्टा लटकाएं.
- नये ब्लेड या गर्म पानी में साफ की गई कैंची से बच्चे की नाल काट दें.
- जिस जगह से नाल काटी गई है वहां टिंचर आयोडीन लगा दें.
बच्चे को खीस पिलाने में बरतें ये ऐहतियात
- जन्म के एक-दो घंटे के अंदर बच्चे को भैंस की खीस जरूर पिलाएं.
- बच्चे को खीस पिलाने के लिए भैंस की जेर गिरने का इंतजार ना करें.
- वक्त रहते बच्चे को पिलाया गया खीस उसे बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
- बच्चे को उसके वजन का 10 फीसद दूध पिलाना चाहिए.
- बच्चे को सुबह-शाम दो बार में दूध पिलाना चाहिए.
- पहला दूध पीने के बाद बच्चे का दो घंटे के अंदर गोबर करना जरूरी है.
- मौसम के मुताबिक बच्चे को ज्यादा सर्दी-गर्मी से बचाने का इंतजाम करें.
- 10 दिन की उम्र पर बच्चे को पेट के कीड़ों की दवा जरूर पिला दें.
- पेट के कीड़ों की दूसरी खुराक बच्चे को 21 दिन की उम्र पर पिलाएं.
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