NOHM: गर्मियों में संक्रमण से बीमार नहीं होंगे पशु, अपनाएं वन हैल्थ मिशन के टिप्स

NOHM: गर्मियों में संक्रमण से बीमार नहीं होंगे पशु, अपनाएं वन हैल्थ मिशन के टिप्स

NOHM पशुपालन मंत्रालय की ओर से नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. मंत्रालय की ओर से समय-समय पर आम जनता समेत पशुपालकों से अपील की जाती रहती है. दोनों ही लोगों के लिए कुछ जरूरी टिप्स भी जारी किए जाते हैं. इसका सीधा मकसद पशु और इंसानों दोनों को ही हर छोटी-बड़ी बीमारी से बचाना है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 05, 2026,
  • Updated Jun 05, 2026, 5:58 PM IST

गर्मियों का मौसम पशुपालन की परेशानियों को बढ़ा देता है. खासतौर पर संक्रमण के चलते परेशानियां और बढ़ जाती हैं. पशुओं और इंसानों को जूनोसिस या जूनोटिक बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इसका पशुपालक को दोहरा नुकसान होता है. एक तो बीमारी के चलते पशुओं का उत्पादन कम हो जाता है, दूसरा बीमारी के इलाज पर पैसा खर्च करना पड़ता है. लेकिन अब जूनोटिक बीमारियों से निपटने और पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. 

मिशन के तहत जहां बायो सिक्योरिटी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, वहीं पशुओं को बीमारी से बचाने को साइंटीफिक तरीके से पशु पालन करने की हिदायत दी जाती है. मिशन से जुड़े एक्सपर्ट की मानें तो NOHM से सिर्फ पशुओं को ही नहीं हयूमन हैल्थ यानि इंसानों को भी जोड़ा गया है. क्योंकि एक्सपर्ट का कहना है कि जूनोटिक डिजीज से इंसान और पशु दोनों ही प्रभावित होते हैं.  

पशुपालकों के लिए हैं ये टिप्स  

पशुपालन मंत्रालय से जुड़े जानकारों की मानें तो वन हैल्थ मिशन के तहत एनीमल फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी बहुत जरूरी है. कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद से तो इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की जाने लगी है.  

  • सबसे पहले अपने एनीमल फार्म की बाड़बंदी कराएं. 
  • बाड़बंदी होने से सड़क पर घूमने वाला जानवर फार्म में नहीं घुसेगा. 
  • फार्म के अंदर और बाहर दवा का छिड़काव कराएं. 
  • हैंड सेनेटाइज में काम आने वाली दवा फार्म पर रखें.
  • फार्म में बाहर से आने वाले व्यक्ति के जूते बाहर ही उतरवाएं.
  • जूते फार्म के बाहर उतरवा नहीं सकते तो उन्हें सेनेटाइज करें. 
  • आने वाले के हाथ और कपड़ों को भी सेनेटाइज करवाएं. 
  • पीपीई किट पहनाकर ही फार्म के अंदर ले जाएं. 
  • फार्म पर नए आने वाले पशु को कम से कम 15 दिन अलग रखें. 
  • छोटे बच्चे, बीमार, गर्भवती, हेल्दी और दूध देने वाले पशुओं को अलग रखें. 
  • बदलते मौसम के हिसाब से बाड़े में पशुओं का रखरखाव रखें. 
  • बरसात के मौसम में पशुओं को खासतौर पर मच्छर-मक्खियों के प्रकोप से बचाएं.

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