जिन पशुओं के खुर होते हैं, खुर के बीच में जगह (गैप) होती है तो ऐसे पशुओं को बरसात में खुरपका-मुंहपका (FMD) होने की आशंका बढ़ जाती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बरसाती संक्रमण के चलते पशुओं को एफएमडी बीमारी होती है. इस बीमारी के चलते पशुओं के खुर में जख्म हो जाते हैं और मुंह पक (छाले) जाता है. मुंह पकने के चलते पशु का खाना-पीना छूट जाता है. साथ ही खुर में जख्म होने के चलते न तो ठीक से चल पाता है और न ही खड़ा हो पाता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक बारिश के दौरान होने वाले जलभराव, यहां-वहां दूषित पानी पीने और सड़ा-गला खाने के चलते पशु एफएमडी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं. एफएमडी बीमारी को लेकर समय-समय पर एडवाइजरी भी जारी होती रहती है. बावजूद इसके बहुत सारे पशुपालन आज भी कई तरह की भ्रांतियों के चलते अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं कराते हैं. जबकि अभी इस बीमारी का एकमात्र इलाज टीकाकरण ही है.
ऐसे करें FMD की पहचान
- गाय-भैंस, भेड़-बकरियों को 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा.
- बुखार आने के साथ ही पशुओं की भूख कम हो जाती है.
- बाड़े में पशु सुस्त रहने लगता है और खाना-पानी छोड़ देता है.
- पीडि़त पशु के मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है.
- मुंह में फफोले हो जाते हैं और चारा समेत कुछ भी खाने की हालत में नहीं होता है.
- खासतौर पर पशुओं के जीभ और मसूड़ों पर बहुत ज्यादा फफोले हो जाते हैं.
- पशु के पैर में खुर के बीच घाव हो जाते हैं, जो अल्सर होता है.
- कई बार तो पीडि़त गाभिन पशु का गर्भपात तक हो जाता है.
- थन में सूजन और पशु में बांझपन की बीमारी आ जाती है.
इस वजह से फैलता है FMD
- दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में एफएमडी रोग जल्दी फैलता है.
- बरसात के दौरान पशु खुले में चरने के दौरान दूषित चारा-पानी खा और पी लेते हैं.
- खुले में पड़ी कुछ सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है.
- फार्म पर नए आने वाले पशु से भी ये बीमारी लग जाती है.
- पहले से ही एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी हो जाती है.
ऐसे करें FMD की रोकथाम
- पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है.
- सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं.
- उसके कान में फ्री लगने वाला ईयर टैग डलवाएं.
- पशु स्वास्थ्य केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं.
- पशुओं को टीका लगवाने के बाद भी 10 से 15 दिन अलर्ट रहने की जरूरत होती है.
- टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है.
- बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें.
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