Moringa Fodder: यही है इस चारे को लगाने का वक्त, आज लगाया तो पूरे साल खाएंगी भेड़-बकरी

Moringa Fodder: यही है इस चारे को लगाने का वक्त, आज लगाया तो पूरे साल खाएंगी भेड़-बकरी

Moringa Fodder भेड़-बकरियों को सूखे चारे के साथ-साथ हरा चारा भी चाहिए होता है. ग्रीन फोडर साइंटिस्ट का कहना है कि मोरिंगा (सहजन) ही एक ऐसा हरा चारा है जो पूरे साल उपलब्ध रहता है. सीआईआरजी, मथुरा में इस पर पांच साल से रिसर्च चल रही है. मोरिंगा में बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है. 

Moringa CultivationMoringa Cultivation
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 21, 2026,
  • Updated Jul 21, 2026, 12:53 PM IST

जुगाली करने और उत्पादन करने वाला पशु भेड़-बकरी हो या फिर गाय-भैंस, सभी को साल के 12 महीने हरे चारे की जरूरत होती है. लेकिन पूरे साल में एक वक्त ऐसा भी आता है कि जब जरूरत के मुताबिक पशुओं के लिए हरा चारा नहीं मिल पाता है. यही वजह है कि अब तो पूरे साल ही हरे चारे की कमी रहती है और जो मिलता है तो वो महंगा होता है. जिसका असर पशुओं के उत्पादन पर पड़ता है. यही वजह है कि पशुपालकों को हमेशा ऐसे हरे चारे की जरूरत रहती है जो दूध बढ़ाने वाला पौष्टिक भी हो और हर मौसम में आसानी से मिल जाए. खासतौर पर दूध देने वाले पशुओं के लिए 12 महीने इसी तरह के हरे चारे की जरूरत होती है. 

ग्रीन फोडर एक्सपर्ट की मानें तो वो मोरिंगा (सहजन) को उगाने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि बेशक मोरिंगा का एक पेड़ होता है, लेकिन कुछ जरूरी बातें ध्यान रखी जाएं तो इसकी पत्तियों के साथ ही इसके तने को भी चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यहां तक की इसके तने के पैलेट्स बनाकर सालभर बकरे और बकरियों को खिलाया जा सकता है. 

इस मौसम में लगाएं मोरिंगा 

फोडर एक्सपर्ट का कहना है कि मोरिंगा लगाने के लिए गर्मी और बरसात का मौसम सही होता है. जैसे बारिश का मौसम चल रहा है. अगर जुलाई में मोरिंगा लगाया तो फायदेमंद रहेगा. लेकिन ख्याल यह रखना है कि इसे पेड़ नहीं बनने देना है. इसके लिए यह जरूरी है कि 30 से 45 सेंटी मीटर की दूरी पर इसकी बुवाई की जाए. इसकी पहली कटाई 90 दिन यानि तीन महीने के बाद करनी है. तीन महीने के वक्त में यह आठ से नौ फीट की हाईट पर आ जाता है.

तो इस तरह से पहली कटाई 90 दिन में करने के बाद बाकी की कटाई हर 60 दिन बाद करनी है. काटते वक्त यह खास ख्याल रखना है कि इसकी कटाई जमीन से एक से डेढ़ फीट की ऊंचाई से करनी है. इससे होता यह है कि नई शाखाएं आने में आसानी रहती है. 

मोरिंगा के तने को बनाएं पैलेट्स  

एक्सपर्ट बताते हैं कि मोरिंगा के तने को भी बकरी खाती है. क्योंकि इसका तना बहुत ही मुलायम होता है. इसकी पत्तियों को भी बकरे और बकरी बड़े ही चाव से खाते हैं. अगर आप चाहें तो पहले बकरियों को पत्तियां खिला सकते हैं. इसके तने को अलग रखकर उसके पैलेट्स बना सकते हैं. पैलेट्स बनाने का एक अलग तरीका है. ऐसा करके आप बकरे और बकरियों के लिए पूरे साल के चारे का इंतजाम कर सकते हैं.  

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