Calf Care in Winter देश में सर्दियां इंसान और पशुओं दोनों के लिए परेशानी खड़ी करती हैं. कड़ाके की ठंड वाला यह मौसम ज़्यादातर करीब दो महीने तक रहता है. इंसान तो इस बदलते मौसम के हिसाब से खुद को ढाल लेता है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है गाय-भैंस के नवजात बछड़ों को. इस दौरान छोटे पशुओं की खास देखभाल जरूरी है क्योंकि यह ब्रीडिंग का भी मौसम होता है. इस दौरान उन्हें बीमारियां आसानी से लग जाती हैं. अगर सिर्फ बछड़ों की बात करें तो तीन महीने की उम्र तक के करीब 32 से 35 फीसद बछड़ों की मौत हो जाती है.
यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट सर्दियों के दौरान बछड़ों के लिए शेड प्लान, फीड मैनेजमेंट और देखभाल पर खास काम करने की जरूरत बताते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि बछड़ों को हैल्दी रखने के लिए बाहरी और अंदरूनी दोनों तरह के पैरासाइट्स के लिए रेगुलर डीवर्मिंग ज़रूरी है. गीले और ठंडे तापमान के कारण सर्दियों में फुट रॉट और निमोनिया भी बड़ी परेशानी बन जाते हैं.
ठंड के मौसम में ऐसा हो बछड़ों का मैनेजमेंट
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि उत्तर भारत के इलाकों में भारी बर्फबारी, ठंडी हवा और पाला बहुत ज़्यादा रिकॉर्ड किया जाता है. नवजात बछड़ों को ऐसे खराब मौसम से बचाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने की ज़रूरत है क्योंकि बछड़े खुले शेल्टर में अपने शरीर का टेम्परेचर मेंटेन नहीं रख पाते हैं. ठंडी हवा बछड़ों की सेहत पर बुरा असर डालती है. खासतौर पर हवा और बारिश मिलकर छोटे जानवरों के शरीर का टेम्परेचर बनाए रखने में दिक्कत पैदा करते हैं.
- शेड में लगे हीट लैंप जानवरों की दीवारों या बिस्तर के संपर्क में नहीं आने चाहिए.
- बच्चों को ज़्यादातर सूखी चीजें जैसे भूसे से बनी एक्स्ट्रा बिस्तर दी जानी चाहिए.
- गर्म और सूखा बिस्तर ठंड के नुकसान को कम करने में मदद करता है.
- गीला बिस्तर कंडक्टिव हीट लॉस को भी बढ़ाता है.
- गहरा बिस्तर गर्म हवा को रोक लेता है.
- लेटते समय बछड़े के पैर भूसे में दबे होने चाहिए.
- ठंड से बचाने के लिए साफ और सूखे कंबल, जूट के बोरे का इस्तेमाल करें.
- गाय के बच्चे सर्दियों में बेसल मेटाबोलिक रेट बढ़ाकर और लंबे बाल उगाकर शरीर से गर्मी निकालते हैं. गायों में एक साथ खड़े होने (दौड़ने) की नैचुरल आदत होती है.
- अपनी इस आदत के चलते गाय अपने बच्चों को ठंड से बचाती हैं.
- खराब मौसम में पशु शरीर का टेम्परेचर बनाए रखने के लिए नॉर्मल से ज़्यादा खाते हैं.
- बछड़ों को क्वालिटी का चारा जैसे घास, अनाज (मक्का, जौ, गेहूं, जई वगैरह) खिलाना चाहिए.
- जानवर के खाने में हमेशा धीरे-धीरे बदलाव करते रहना चाहिए.
- स्ट्रेस का सामना करने के लिए मिनरल मिक्सचर सप्लीमेंट ज़रूरी है.
- बढ़ते जानवरों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी या क्वांटिटी में कमी न करें.
- अगर किसी जानवर को ठंड लगती है, तो जानवर को रेगुलर गुनगुना पानी दें.
- रेगुलर तौर पर फुट रॉट और खुर की हालत की जांच करें.
- ट्रिमिंग और ट्रीटमेंट करके भी बछड़ों की देखभाल करें.
- कमजोर और बीमार जानवरों का ज़्यादा ध्यान रखना ज़रूरी है.
- नए जन्मे बछड़े के लिए थर्मल न्यूट्रल जोन 50-78°F होता है.
- थर्मल न्यूट्रल जोन हवा, नमी, बालों की परत और बिस्तर के वैरिएबल पर निर्भर करता है.
- एक महीने की उम्र तक बछड़ा ज़्यादा ठंड बर्दाश्त कर लेता है.
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