
मौसम हिचकोले ले रहा है तो कहना गलत नहीं होगा. पता ही नहीं चल रहा है कि किस वक्त कैसा मौसम और तापमान रहेगा. इस वक्त जहां मौसम पल-पल करवट ले रहा है तो तापमान में भी उतार-चढ़ाव आ रहा है. दोपहर में धूप गर्म होती है तो शाम होते-होते बारिश की बूंदा-बांदी से मौसम में ठंडक आ जाती है. रात में तो तापमान और गिर जाता है. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो यही तीन तरह का तापमान मुर्गियों और चूजों को सबसे ज्यादा परेशानी पहुंचाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि मौसम गर्मी का हो या सर्दी-बरसात का, पोल्ट्री फार्म में एक तय मानक के हिसाब से ही तापमान चाहिए.
मतलब मानक से ना कम और ना ज्यादा. तापमान अगर जरा भी कम-ज्यादा होता है तो कई बार मुर्गियों की जान पर भी बन आती है. अंडे का उत्पादन गिर जाता है और चिकन के लिए पाले जा रहे मुर्गा की ग्रोथ पर भी असर पड़ने लगता है. इस मौसम में पोल्ट्री फार्म में पलने वालीं मुर्गियों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. क्योंकि मौसम कोई भी हो, लेकिन पोल्ट्री फार्म के अंदर एक तय तापमान की जरूरत होती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियां हो या फिर ब्रॉयलर चिकन सभी को पोल्ट्री फार्म में 25 से 26 डिग्री तापमान की जरूरत होती है. अगर तापमान इससे कम या ज्यादा होता है तो मुर्गियां परेशान होने लगती हैं. मुर्गियों को मौसम की इस परेशानी से बचाने के लिए पोल्ट्री फार्म में तापमान बताने वाले उपकरण लगाए जाते हैं.
जैसे सर्दी के मौसम में तापमान चार से पांच डिग्री तक चला जाता है. तो ऐसे तापमान में मुर्गियां ठंड की चपेट में न आएं और उन्हें गर्मी मिलती रहे इसके लिए फार्म में ब्रूडर लगाए जाते हैं. यह हीटर की तरह से काम करते हैं. ब्रूडर गैस और बिजली दोनों से ही काम करते हैं.
ब्रूडर का इस्तेमाल खासतौर पर अंडे देने वाली लेयर मुर्गी के फार्म में किया जाता है. ब्रॉयलर चिकन के बड़े-बड़े फार्म में भी ब्रूडर का इस्तेंमाल होता है. लेकिन कुछ जगहों पर जहां संख्या कम होती है वहां लकड़ी का बुरादा और कोयले जलाकर भी ब्रॉयलर चिकन को गर्माहट दी जाती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्गियों किसी भी तरह के मौसम में खुद को असहज महसूस करती हैं. और इसका सीधा असर अंडे और चिकन के उत्पादन पर पड़ता है. उत्पादन बना रहे इसके लिए सर्दी-गर्मी हर तरह के मौसम में मानक के हिसाब से पोल्ट्री फार्म में तापमान को बनाए रखना चाहिए. साल में 365 दिन होते हैं.
जबकि अंडा देने वाली लेयर बर्ड (मुर्गी) एक साल में 285 310 तक ही अंडे देती है. 55 से 80 दिन अंडा न देने के पीछे एक्सपर्ट वैसे तो बहुत सारी वजह बताते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनसे मुर्गी असहज महसूस करती है. अगर इसकी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ भी थोड़ा सा अलग होता है तो यह अंडा देना बंद कर देती है.
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