लंपी स्किन डिजीज पर यूपी सरकार अलर्ट, रोकथाम के लिए 606 टीमें तैनात

लंपी स्किन डिजीज पर यूपी सरकार अलर्ट, रोकथाम के लिए 606 टीमें तैनात

उत्तर प्रदेश में पशुओं को लंपी स्किन डिजीज से बचाने के लिए सरकार ने 25 जिलों में 606 टीमें तैनात की हैं. अब तक 16 लाख से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है. विभाग ने संक्रमित पशुओं को अलग रखने और साफ-सफाई पर भी जोर दिया है.

क‍िसान तक
  • Lucknow,
  • Sep 19, 2026,
  • Updated Sep 19, 2026, 4:11 PM IST

देश में फिर एक बार लंपी वायरस का खरता तेजी से बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए उत्तर प्रदेश में पशुओं को लंपी स्किन डिजीज से बचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पशुधन विभाग ने बीमारी से प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में निगरानी, इलाज और टीकाकरण तेज कर दिया है. इसके लिए प्रदेश के 25 जिलों में 606 टीमें तैनात की गई हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं.

16 लाख से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण

पशुधन विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 16,08,548 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है. वहीं, लंपी स्किन डिजीज से अब तक 9,003 पशुओं के प्रभावित होने की सूचना है. संक्रमित पशुओं की पहचान के बाद उनका इलाज और जरूरी चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है. पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने अधिकारियों को प्रभावित जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और बीमारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

संक्रमित पशुओं को अलग रखने पर जोर

बीमारी को फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी जा रही है. इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में रिंग वैक्सीनेशन, पशुओं के आसपास मच्छर-मक्खी जैसे कीटों की रोकथाम, साफ-सफाई और कीटाणुनाशक का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया जा रहा है. 606 टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं. ये टीमें पशुपालकों को लंपी बीमारी के लक्षण और इससे बचाव के तरीकों की जानकारी भी दे रही हैं. किसी पशु में बीमारी के लक्षण मिलने पर पशु चिकित्सा टीम को तुरंत सूचना देने की सलाह दी जा रही है.

गांवों में लगाए जाएंगे टीकाकरण कैंप

विभाग की ओर से पशु चिकित्सकों को तय समय पर अस्पतालों में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही गांवों में टीकाकरण कैंप लगाकर ज्यादा से ज्यादा पशुओं को वैक्सीन लगाने पर जोर दिया जा रहा है. पशु सखी, पैरावेट और मैत्री को भी जरूरी प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि टीकाकरण अभियान को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके.

इसके अलावा अधिकारियों को प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं. साथ ही जनप्रतिनिधियों, पशुपालकों और गोशाला संचालकों के साथ जागरूकता बैठकें करने को कहा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीमारी से बचाव की जानकारी मिल सके.

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

पशुपालकों को सलाह दी जा रही है कि अगर किसी पशु के शरीर पर गांठें, बुखार, त्वचा पर घाव या दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर दें और पशु चिकित्सक से जांच कराएं. साथ ही पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखें और मच्छर-मक्खियों जैसे कीटों को नियंत्रित करें. समय पर बीमारी की पहचान, टीकाकरण और इलाज से संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है. इससे पशुओं की सुरक्षा के साथ पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम किया जा सकता है. 

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