Green Fodder: बढ़ जाएगा दूध-मीट का उत्पादन, सर्दियों में बकरी को खि‍लाएं ये चारा 

Green Fodder: बढ़ जाएगा दूध-मीट का उत्पादन, सर्दियों में बकरी को खि‍लाएं ये चारा 

Green Fodder बकरे-बकरियों को लगातार एक ही तरह का हरा चारा देना बहुत ज्यादा फायदेमंद नहीं रहता है. जबकि होना ये चाहिए पशु का दिनभर का चारा ऐसा हो जो उसकी जरूरत के सभी तत्वों को पूरा करता हो. लेकिन सर्दियों में ऐसे चारे की कमी रहती है. इसी कमी को दूर करने के लिए चारा एक्सपर्ट के मुताबिक सितम्बर में इस तरह से चारा की फसल की बुवाई की जा सकती है.  

पशुओं के लिए हरा और सस्ता चारापशुओं के लिए हरा और सस्ता चारा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 22, 2026,
  • Updated Sep 22, 2026, 3:51 PM IST

पशु छोटा हो या बड़ा, सभी को उत्पादन के लिए अच्छी खुराक की जरूरत होती है. एक ऐसी खुराक जिसमे कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स शामिल हों. खासतौर से ऐसे पशुओं के लिए जो दूध के साथ ही मीट उत्पादन भी करते हैं. फिर वो चाहें बकरे-बकरी ही क्यों न हों. क्योंकि एनिमल एक्सपर्ट का भी कहना है कि बकरे-बकरियों को अगर बैलेंस डाइट मिलती है तो उनके दूध की क्वालिटी सुधरने के साथ ही मीट का उत्पादन भी बढ़ता है. इतना ही नहीं बकरियों की प्रजनन क्षमता भी मजबूत होती है. लेकिन हमारे बकरी पालक अक्सर एक ही तरह की गलती को दोहराते हैं. 

जब जिस मौसम में जो हरा चारा ज्यादा होता है तो उसी को बकरी पालक पशुओं को ज्यादा से ज्यादा खिलाते हैं. जबकि डाइट हमेशा बैलेंस होनी चाहिए जैसा ऊपर बताया गया है. इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि दूध देने और मीट का उत्पादन करने वाले पशुओं को दिनभर की खुराक दिए जाने के दौरान इस बात की जानकारी होना जरूरी है कि हम उसे जो चारा खि‍ला रहे है उसमे जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं. या फिर कौन-कौनसा चारा खि‍लाने से उन पोषक तत्वों की कमी पूरी होगी. 

दलहनी चारा बढ़ाएगा उत्पादन

चारा एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे की एक फसल कम से कम ऐसी होनी चाहिए जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक उपज दे. जैसे नेपियर घास को बहुवर्षिय चारा कहा जाता है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक उपज देता है. नेपियर घास भी उसी में से एक है. एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक हरा चारा लिया जा सकता है. लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा सकता है कि पशुओं को सिर्फ नेपियर घास ही खि‍लाते रहें. अगर आप पशु को नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ उसे दलहनी चारा भी खिलाएं. 

इसके लिए सितम्बर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है. हर मौसम में आप नेपियर के साथ सीजन के हिसाब से दूसरा हरा चारा लगा सकते हैं. ऐसा करने से पशु को नेपियर घास से कर्बोहाइड्रेड है तो लोबिया से प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स मिलते हैं. और इसी तरह की खुराक से भेड़-बकरी में मीट की ग्रोथ होती है तो गाय-भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ता है. 

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

MORE NEWS

Read more!