
कोई बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ, सिर्फ एक साल पहले ही बाजार में एक अंडा 6 रुपये तक का बिक रहा था. वो भी सीजन के दौरान यानि की सर्दियों के मौसम में. लेकिन साल 2026 में जैसे ही गर्मियों का मौसम शुरू हुआ तो अंडों के दाम ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. गर्मी में अंडे के होलसेल दाम 7 रुपये और उससे ज्यादा तक पहुंच गए. जबकि गर्मियों में अंडा 4 से 4.50 रुपये के होलसेल रेट पर बिकता था. हालांकि अभी अंडे के होलसेल रेट 5 से 5.70 रुपये तक हैं. जबकि सुपर मार्केट और मॉल की बात छोड़ दें तो गली-मोहल्ले की दुकानों पर एक अंडा 8 रुपये तक का बिक रहा है.
वहीं पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अक्टूबर से अंडों की डिमांड बढ़ जाएगी. डिमांड बढ़ते ही पोल्ट्री किसान भी अपने अंडों के दाम बढ़ा देंगे. क्योंकि अभी तो किसान लागत के आसपास ही अंडों को होलसेल दाम पर बेच रहे हैं. अगर अंडों के महंगे होने की वजह पर बात करें तो इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं. जैसे फीड का महंगा होना, अंडों की डिमांड बढ़ना और मुर्गियों को दी जाने वाली दवाईयों के दाम बढ़ना.
पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा ने किसान तक को बताया कि पोल्ट्री सेक्टर में दो चीजों के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं, पहला फीड और दूसरी हैं दवाईयां. अंडे देने वाली मुर्गी का फीड एक साल पहले 22 रुपये किलो तक बिकता था. जबकि आज उसी फीड के रेट 33 रुपये किलो हो चुके हैं. फीड में मिलाए जाने वाले मिनरल्स भी महंगे हो चुके हैं. मुर्गियों को बीमार होने पर दी जाने वालीं बहुत सारी दवाईयां इंपोर्ट होती हैं, ये भी महंगी हो चुकी हैं. हालत ये है कि एक साल पहले तक जिस अंडे की लागत 4.5 रुपये से लेकर 4.75 रुपये तक थी वो आज 5.5 रुपये तक पहुंच चुकी है. पोल्ट्री किसान लागत मूल्य पर अंडा बेचने को मजबूर हैं.
पोल्ट्री एक्सपर्ट और पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) के ज्वाइंट सेक्रेटरी रिकी थापर ने किसान तक को बताया कि अंडे के रेट बढ़ने के पीछे फीड तो बढ़ी वजह है ही, लेकिन साथ में अंडे की डिमांड बढ़ना भी इसका बड़ा कारण है. क्योंकि आज देश के कई राज्यों में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में अंडा खाने को दिया जा रहा है. कहीं हफ्ते में एक अंडा दिया जा रहा है तो कहीं दो अंडे बच्चों को दिए जा रहे हैं. इसके अलावा भी बाजार में अंडों की डिमांड बढ़ी है.
फीड एसोसिएशन कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के प्रेसिडेंट दिव्य कुमार गुलाटी ने किसान तक को बताया कि पोल्ट्री फीड में शामिल होने वाले दो मुख्य तत्व सोयाबीन और मक्का की हालत खराब है. महाराष्ट्र में सूखे के चलते सोयाबीन की फसल बहुत खराब हुई है. मध्य प्रदेश में भी सोयाबीन पर असर पड़ा है. ये दोनों ही सोयाबीन के बड़े क्षेत्र हैं.
फीड में सोयाबीन की हिस्सेदारी 25 फीसद तक है. इतना ही नहीं मक्का की बुवाई का रकबा भी 8 से 10 फीसद तक घटा है. फीड में 55 फीसद तक मक्का इस्तेमाल की जाती है. खेती पर अलनीनो का बहुत ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. मक्का को सबसे ज्यादा इथेनॉल ने प्रभावित किया है. अलनीनो का असर पड़े बिना मक्का की फसल सही-सलामत कट जाए ये भी देखने वाली बात होगी.
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