‘हम भारत को वर्ल्ड का पोल्ट्री लीडर बना सकते हैं. क्योंकि सरकार पॉलिसी और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर दे सकती है. हमारे साइंटिस्ट हमे नॉलेज दे सकते हैं. इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी और इंवेस्टमेंट दे सकती है. और इन सब को जोड़ने वाला है हमारा मेहनतकश किसान, जो देश में करोड़ों की संख्या में है. इसके साथ ही हमारे पास एग्रीकल्चर बेस है, साइंटीफिक इंस्टीट्यूशन हैं, कैपेसिटी में वैक्सीन और दवाई बनाने वाली फार्मा यूनिट हैं. टैलेंटेड वेटनेरियन की बड़ी फौज है. ये सब वो हैं जो वर्ल्ड में इंडियन पोल्ट्री को नंबर वन बना सकते हैं. लेकिन, इसके साथ ही हमे पोल्ट्री सेक्टर में 6 बड़े काम करने की भी जरूरत है.
जैसे पोल्ट्री फीड, बीमारियां, वैक्सीन, प्लानिंग में किसान, हर एक पोल्ट्री फार्म बायोसिक्योर हो, रिसर्च और इननोवेशन में निवेश बढ़ाना. अगर ये काम हो जाएं तो फिर इंडियन पोल्ट्री को नंबर वन बनने से कोई नहीं रोक सकता है.’ ये कहना है पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा का. केरल में फेडरेशन की एनुअल जनरल मीटिंग के दौरान उन्होंने ये बात कही.
आने वाले 10 साल की चुनौतियां
रनपाल ढांढा का कहना है कि पोल्ट्री में हम बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन सवाल ये भी है कि क्या हम पोल्ट्री सेक्टर में 10 साल में आने वालीं चुनौतियों के लिए भी तैयार हैं. क्योंकि ये वो चुनौतियां हैं जो पोल्ट्री की कामयाबी में रोड़ा बनी हुई हैं. जैसे,
पोल्ट्री फीड
- फीड सिक्योरिटी को राष्ट्रीय वरीयता बनाना होगा.
- बिना फीड पर काम हुए दूसरे देशों से कंपटीशन नहीं कर सकते हैं.
- क्योंकि पोल्ट्री प्रोडक्शन की लागत का एक बड़ा हिस्सा फीड पर खर्च होता है.
- फीड को सस्ता करने के लिए सोयाबीन और मक्का पर काम करना होगा.
- फीड सस्ता नहीं होगा तो किसानों का मुनाफा, ग्राहक को सस्ता प्रोडक्ट नहीं मिल पाएगा.
- आज ऐसे बीज हैं मक्का के जिससे एक हेक्टेयर में 10–11 टन तक उत्पादन हो रहा है.
- ऐसे बीज हर किसान के खेत तक पहुंचने चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय औसत 3–4 टन का है.
- सोयाबीन मील भी फीड का प्रुख तत्व है, मक्का की तरह से इस पर भी काम होना चाहिए.
- सोयाबीन की उत्पादकता और उपलब्धता बढ़ाने पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है.
पोल्ट्री डिजीज
- फीड हमारी पहली बड़ी चुनौती है तो बीमारियां दूसरे नंबर की चुनौती है.
- बीमारियों के चलते पोल्ट्री सेक्टर को बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है.
- जरूरत है कि डिजीज सर्विलासं को अर्ली वार्निंग सिस्टम में बदला जाए.
- पोल्ट्री फार्मिंग में आपस में बहुत ज्यादा जुड़ी हुई है, मतलब बहुत सघन है.
- यही वजह है कि किसी भी बीमारी का आउट ब्रेक किसी एक फार्म की परेशानी नहीं होती है.
- आज बीमारियों से निपटने के लिए नेशनल पोल्ट्री डिजीज सर्विलांस ग्रिड की है.
- फार्म को वेटनेरियन, जिला-राज्य लेबोरेटरी और नेशनल रिफरेंस लेबोरेटरी से जोड़ा जाए.
- एक ऐसा इंटीग्रेटेड सिस्टम बने जो डिजीटल नेटवर्क से जुड़ा होगा.
- किसानों को बीमारियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न की डराया जाए.
वैक्सीनेशन
- देश की कंडीशन के हिसाब से वैक्सीन पर काम किया जाए.
- पोल्ट्री वैक्सीन में देश को वैक्सीन का मार्केट नहीं इननोवेशन लीडर बनाना चाहिए.
- साइंस और इंडस्ट्री मिलकर काम करेंगे तो जरूर इंडियन सॉल्यूशन निकलेगा.
- इंडीजीनियस स्ट्रेन बेस्ड वैक्सीन डवलपमेंट प्रोग्राम को और मजबूत किया जाए.
- आईसीएआर, वेटरनरी यूनिवर्सिटी, सरकार, वैक्सीन और पोल्ट्री इंडस्ट्री मिलकर रिसर्च करें.
- हर एक पोल्ट्री फार्म को बायो सिक्योरिटी से लैस किया जाए.
- बायो सिक्योरिटी में इंवेस्टमेंट बढ़ाया जाए.
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