
लस्सी, आइसक्रीम के चलते गर्मियों में दूध की डिमांड बढ़ जाती है. वहीं बढ़ते तापमान, लू और भीषण गर्मी के चलते पशुओं का दूध उत्पादन कम हो जाता है. ऐसे में दूध में मिलावट और कृत्रिम तरीके से दूध बनाने वाले सक्रि य हो जाते हैं. दूध में कई तरीके की मिलावट की जाती है. ऐसे में ये इंसानों को किस तरह से नुकसान पहुंचा होगा इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दूध किसी भी परिवार और किचिन की रोजमर्रा की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. आज दिन की शुरुआत दूध के बिना करने की सोचना मुश्किल होता है. धार्मिक क्रिया-कलाप में भी दूध का बड़ा ही महत्व है.
लेकिन दूध के प्योर होने पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. दूध में अब सिर्फ पानी की ही मिलावट नहीं होती है, दूध ही सिंथेटिक तरीके से तैयार कर दिया जाता है. दूध तैयार करने में भी ऐसी-ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है कि उनके नाम सुनकर अपने पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.
दूध की बूंद को चिकनी सतह पर गिराएं.
अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है.
मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी.
3 एमएल दूध में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की 10 बूंद मिलाएं.
एक चम्मच चीनी मिलाने के पांच मिनट बाद लाल रंग हो जाएगा.
आयोडीन की कुछ बूंदें दूध में मिलाएं.
मिलाने पर मिश्रण का रंग नीला हो जाएगा.
टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध और सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाएं.
पांच मिनट बाद लाल लिटमस पेपर इसमें डुबोएं.
अगर पेपर का रंग नीला हो जाए तो यूरिया मिला है.
10 एमएल दूध में 5 एमएल सल्फ्यूरिक एसिड मिलाएं.
बैंगनी रंग की रिंग का बनना फॉर्मेलिन होने का संकेत.
दूध लंबे समय तक ठीक रखने के लिए फॉर्मेलिन मिलाते हैं.
सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है.
उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है.
गर्म करने पर पीला पड़ जाता है.
अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग
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