Infertility in Animal: तय वक्त से ज्यादा न करें गाय-भैंस की हीट का इंतजार, जरूर करें ये खास काम 

Infertility in Animal: तय वक्त से ज्यादा न करें गाय-भैंस की हीट का इंतजार, जरूर करें ये खास काम 

Infertility in Animal जो गाय-भैंस वक्त से हीट में नहीं आती और बच्चा नहीं देती है तो वो पशुपालक के मुनाफे को कम कर लागत को बढ़ा देती हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो दो से ढाई साल की भैंस भी उतना ही खाती है जितना दूध देने वाली भैंस. इसलिए जब भी भैंस दो से ढाई साल की होने के बाद भी हीट में ना आए तो फौरन ही पशु चिकित्सक की सलाह लेकर उसका इलाज शुरू करा दें. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 19, 2026,
  • Updated Feb 19, 2026, 8:30 AM IST

पशुपालन गाय-भैंस हो हो या फिर भेड़-बकरी का, मुनाफे का अर्थशास्त्र पूरी तरह उनके बच्चा देने पर टिका होता है. और बच्चा तभी होगा जब पशु वक्त से हीट में आएगा और उसे गाभि‍न कराया जाएगा. लेकिन कई बार पशुपालक पशुओं की हीट को पहचानने में नाकामयाब रहते हैं या फिर पशु वक्त से हीट में नहीं आता है और पशुपालक इंतजार करते रहते हैं. इसका एक नुकसान ये भी होता है कि इस तरह की लापरवाही से पशु बांझ तक हो जाता है. और पशुपालन में मुनाफा तभी होगा जितनी जल्दी पशु हीट में आएंगे. 

इतना ही नहीं पशुपालन की लागत भी पशुओं के वक्त से हीट में आने और बच्चा देने से जुड़ी होती है. एनिमल एक्सपर्ट का दावा है कि देशभर के करीब 30 फीसद दुधारू पशुओं में बाझंपन की परेशानी देखी जा रही है. लेकिन छोटी-छोटी बातों पर गौर कर बांझपन की बीमारी को जड़ से भी खत्म किया जा सकता है. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (गडवासु), लुधियाना के साइंटिस्ट लगातार पशुओं के बांझपन को खत्म करने और उसके इलाज को सस्ता बनाने में लगे हुए हैं. 

वक्त से इलाज है बांझपन की दवा  

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि एडवांस्ड इनसाइट्स ऑन थेरियोजेनोलॉजी टू अमेलियोरेट रिप्रोडक्टिव हेल्थ ऑफ डोमेस्टिक एनिमल्स" जैसे विषय पर पशुपालकों के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इस कार्यक्रम के तहत पशुपालकों को सबसे पहले यह बताया जाता है कि अगर वो चाहते हैं कि उनके पशुओं में बांझपन की परेशानी ना हो तो उन्हें सबसे पहला काम यह करना है कि वो बांझपन का इलाज कराने में देरी न करें. क्योंकि बांझपन जितना पुराना होगा तो उसके इलाज में उतनी ही परेशानी और बढ़ आएगी. 

इसलिए सही समय पर पशुओं की जांच कराते रहें. अगर भैंस दो से ढाई साल की हो जाए और हीट में नहीं आए तो ऐसे में ज्यादा से ज्यादा दो से तीन महीने तक ही इंतजार करें. अगर फिर भी भैंस हीट में नहीं आती है तो फौरन अपने पशु की जांच कराएं. इसी तरह से गाय के साथ है. अगर गाय डेढ़ साल में हीट पर न आए तो उसे भी दो-तीन महीने इंजार के बाद डॉक्टर से सलाह लें. 

पहले बच्चे के बाद करें ये काम 

कई बार ऐसा भी होता है कि एक बार बच्चा देने के बाद भी पशुओं में बांझपन की शिकायत आती है. इसलिए अगर गाय-भैंस एक बार बच्चा देती है तो दोबारा उसे गाभिन कराने में देरी न करें. आमतौर पर पहली ब्यात के बाद दो महीने का अंतर रखा जाता है. लेकिन इस अंतर को ज्यादा ना रखें. अंतर जितना ज्यादा रखा जाएगा बांझपन की परेशानी बढ़ने की संभावना उतनी ही ज्यादा हो सकती है.   

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