
अगर खासतौर पर सिर्फ गायों की बात करें तो ठंड के बाद धूप में तेजी आते ही गायों में सात अलग-अलग लक्षण दिखाई देने लगते हैं. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे ही गायों में सात लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही अलर्ट हो जाएं. गायों पर पैनी नजर रखना शुरू कर दें. खासतौर पर गाय के खानपान पर ध्यान दें कि वो ठीक से जरूरत के मुताबिक पूरा चारा खा रही है या नहीं. क्योंकि धूप तेज होते ही गायों में थिलेरियोसिस बीमारी होने लगती है. और इस बीमारी की बड़ी वजह किलनी है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस बीमारी के सात लक्षण होते हैं.
अगर गाय में एक भी लक्षण दिखाई दे तो फौरन ही उसका इलाज शुरू कर दें. क्योंकि इस बीमारी की चपेट में आते ही गाय खाना-पीना कम कर देती है. साथ ही उसका दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. गायों में थिलेरियोसिस बीमारी किलनी के चलते होती है. इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह से पशुओं के बाड़े में कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि थिलेरियोसिस बीमारी सबसे ज्यादा विदेशी और संकर नस्ल की गायों में होती है. ये बीमारी चिलेरिया एनुलेटा नाम के प्रोटोजोआ से होती है. ये एक खास किलनी हायलोमा एनुटोलिकम के काटने से होता है. जब कोई किलनी किसी पीडि़त पशु का खून चूसती है तो ये परजीवी किलनी के शरीर में आ जाते हैं और इनकी संख्या बढ़ने लगती है. और जब यही किलनी किसी हेल्दी पशु का खून चूसती है तो लार के माध्यम से यह परजीवी उस पशु के खून में चले जाते हैं और हेल्दी पशु भी थिलेरियोसिस की चपेट में आ जाता है.
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