Cow Care in Disease: धूप में तेजी आते ही गायों में दिखाई दें ये 7 लक्षण तो हो जाएं अलर्ट

Cow Care in Disease: धूप में तेजी आते ही गायों में दिखाई दें ये 7 लक्षण तो हो जाएं अलर्ट

Cow Care in Disease थिलेरियोसिस एक खतरनाक बीमारी है, अगर वक्त रहते ध्यान नहीं दिया और गाय का इलाज नहीं कराया तो 15-20 दिन में गाय की मौत भी हो सकती है. और ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि इस बीमारी का गाय के दूध उत्पादन और उसकी ग्रोथ दोनों पर ही असर पड़ता है. लेकिन पशुपालक अगर गाय में दिखने वाले सात लक्षणों पर नजर रखता है तो थिलेरियोसिस का इलाज वक्त रहते शुरू कर काबू पाया जा सकता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 20, 2026,
  • Updated Jan 20, 2026, 4:49 PM IST

अगर खासतौर पर सिर्फ गायों की बात करें तो ठंड के बाद धूप में तेजी आते ही गायों में सात अलग-अलग लक्षण दिखाई देने लगते हैं. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे ही गायों में सात लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही अलर्ट हो जाएं. गायों पर पैनी नजर रखना शुरू कर दें. खासतौर पर गाय के खानपान पर ध्यान दें कि वो ठीक से जरूरत के मुताबिक पूरा चारा खा रही है या नहीं. क्योंकि धूप तेज होते ही गायों में थिलेरियोसिस बीमारी होने लगती है. और इस बीमारी की बड़ी वजह किलनी है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस बीमारी के सात लक्षण होते हैं. 

अगर गाय में एक भी लक्षण दिखाई दे तो फौरन ही उसका इलाज शुरू कर दें. क्योंकि इस बीमारी की चपेट में आते ही गाय खाना-पीना कम कर देती है. साथ ही उसका दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. गायों में थिलेरियोसिस बीमारी किलनी के चलते होती है. इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह से पशुओं के बाड़े में कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं. 

ज्यादातर गाय पर अटैक करती है थिलेरियोसिस 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि थिलेरियोसिस बीमारी सबसे ज्यादा विदेशी और संकर नस्ल की गायों में होती है. ये बीमारी चिलेरिया एनुलेटा नाम के प्रोटोजोआ से होती है. ये एक खास किलनी हायलोमा एनुटोलिकम के काटने से होता है. जब कोई किलनी किसी पीडि़त पशु का खून चूसती है तो ये परजीवी किलनी के शरीर में आ जाते हैं और इनकी संख्या बढ़ने लगती है. और जब यही किलनी किसी हेल्दी पशु का खून चूसती है तो लार के माध्यम से यह परजीवी उस पशु के खून में चले जाते हैं और हेल्दी पशु भी थिलेरियोसिस की चपेट में आ जाता है. 

गायों में ये होते हैं थिलेरियोसिस के लक्षण 

  • पीडि़त पशु को तेज बुखार आता है और उसकी सतही लसिका ग्रंथियों में सूजन आ जाती है.
  • नाक से पानी बहता है, हॉर्ट बीट तेज हो जाती है और खून की कमी होने लगती है. 
  • पशु जब थिलेरियोसिस की चपेट में आता है तो उसे  कब्ज और दस्त हो जाते हैं. 
  • अगर इन सभी लक्षण वाले पशु को वक्त से इलाज न मिले तो 15 से 20 दिन में 70 फीसद पशुओं की मौत हो जाती है. 

थिलेरियोसिस का ऐसे करें इलाज 

  • पशुचिकित्सक की सलाह से बूपारवाकेन का टीका लगवाना चाहिए.
  • थिलेरियोसिस की रोकथाम के लिए "रक्षावैक टी" टीका लगवाएं. 
  • "रक्षावैक टी" पशुओं की इम्यूनिटी को बढ़ाता है.
  • किलनी की रोकथाम के लिए पशु बाड़े में कीटनाशक स्प्रे कराने के साथ साफ-सफाई भी रखें.

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