
उज्जैन की गिर गाय राधा ने दुग्ध उत्पादन में पूरे मध्यप्रदेश में पहला स्थान हासिल किया.पशुपालक गौरव रघुवंशी की गाय ने प्रतिदिन औसतन 19.760 लीटर दूध देकर नया रिकॉर्ड बनाया है.गोवर्धन पर्व पर 9 नवंबर को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विजेता पशुपालकों को सम्मानित करेंगे.
मध्यप्रदेश में देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बीच उज्जैन जिले से एक शानदार उपलब्धि सामने आई है. जिले के वृंदावन ग्राम तालोद निवासी पशुपालक गौरव रघुवंशी की गिर नस्ल की गाय ‘राधा’ ने दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है.
राधा ने प्रतिदिन औसतन 19 लीटर 760 ग्राम दूध का उत्पादन कर प्रदेश की सर्वाधिक दूध देने वाली गाय का रिकॉर्ड अपने नाम किया है.यह उपलब्धि न केवल पशुपालक गौरव रघुवंशी की मेहनत और समर्पण का परिणाम है, बल्कि देशी नस्ल की गायों की बेहतर उत्पादन क्षमता को भी साबित करती है.
पशुपालक गौरव रघुवंशी के मुताबिक, राधा उनके लिए सिर्फ एक गाय नहीं, बल्कि परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य है.उसकी बेहतर देखभाल, संतुलित आहार, नियमित रखरखाव और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इसी का नतीजा है कि राधा ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया.
गिर गाय राधा की इस उपलब्धि के लिए उसके पशुपालक गौरव रघुवंशी को 9 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा.गोवर्धन पर्व के अवसर पर भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय पशुपालक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विजेता पशुपालकों को पुरस्कार प्रदान करेंगे.इस अवसर पर प्रदेश के 10 पशुपालकों को सांकेतिक रूप से पुरस्कृत किया जाएगा. वहीं मध्यप्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर गौ-पूजन और पशुपालक सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे.
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत आयोजित प्रतियोगिता में प्रदेश की पांच गायों ने सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाली गायों की सूची में जगह बनाई है.
4. रायसेन: ज्ञानेश्वर पटेल की गिर गाय – 16.350 लीटर प्रतिदिन।
5. राजगढ़: सुमेर सिंह पंवार की गाय – 16.144 लीटर प्रतिदिन।
इन सभी पशुपालकों की उपलब्धियां प्रदेश में देशी गोवंश के संरक्षण, उन्नत पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण हैं.
पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के अंतर्गत यह प्रतियोगिता आयोजित कराई थी. प्रतियोगिता 27 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चली.इस योजना का उद्देश्य देशी नस्ल की उन्नत गायों के पालन को प्रोत्साहित करना और पशुपालकों को अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए प्रेरित करना है.
प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल करने वाले पशुपालकों को क्रमशः 1 लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।/. इसके साथ ही उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा.सभी विजेता पशुपालकों को पुरस्कार राशि एक साथ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी.
मध्यप्रदेश वर्तमान में देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है. राज्य सरकार द्वारा पशुपालन, गौसंवर्धन और देशी नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं चलाई जा रही हैं.
वृंदावन ग्राम योजना और गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना जैसी पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना है.इससे पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ देशी गोवंश की नस्लों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिल रहा है.
उज्जैन की गिर गाय राधा की उपलब्धि इसी दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है. इसने साबित किया है कि बेहतर पोषण, देखभाल और पशुपालन प्रबंधन के जरिए देशी नस्ल की गायें भी दुग्ध उत्पादन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं.