
दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट में पेश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की रिपोर्ट में पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट में प्रदूषण के स्रोतों से जुड़े अध्ययनों के आंकड़े भी दिए गए हैं, जिनके अनुसार एनसीआर के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान परिवहन क्षेत्र का है.
रिपोर्ट के अनुसार धान के अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है. वर्ष 2021 की तुलना में 15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच पंजाब में 91.9 प्रतिशत और हरियाणा में 98.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
CAQM ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्रोतों पर अध्ययन के आंकड़े पेश किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली और NCR की हवा की क्वालिटी पर स्थानीय स्रोतों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर हवा के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने वाले प्रदूषण का भी असर पड़ता है.
दिल्ली के AQI को तय करने वाले मुख्य प्रदूषक के रूप में PM2.5 की पहचान की गई है. इसी आधार पर 2015 से 2025 के बीच हुए अध्ययनों का मेटा-विश्लेषण किया गया. इसमें किसी एक रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय कई अध्ययनों को शामिल किया गया है. विश्लेषण के नतीजे रिपोर्ट में दी गई तालिका में दर्ज हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक सर्दियों के दौरान NCR के भीतर और बाहर से दिल्ली की हवा को प्रभावित करने वाले मुख्य स्रोत ये हैं-
• परिवहन
• उद्योग, जिसमें थर्मल पावर प्लांट भी शामिल हैं
• धूल, जो सड़क, मिट्टी और निर्माण व तोड़फोड़ के काम से उठती है
• बायोमास जलाना, जिसमें कचरा, घरेलू इस्तेमाल और फसल के अवशेष जलाना शामिल है
• सेकेंडरी पार्टिकुलेट, जो परिवहन, उद्योगों और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों से निकलने वाली गैसीय उत्सर्जनों से बनते हैं
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 19 से 24 प्रतिशत है. वहीं बायोमास जलाने का योगदान 17 से 23 प्रतिशत है.(अनीषा माथुर का इनपुट)