
हरियाणा में करनाल के राष्ट्रीय डेरी मेले में आयोजित दुग्ध प्रतियोगिता में झंझाड़ी गांव के रहने वाले सुनील मेहला की गाय ने 1 दिन में 78 लीटर दूध देकर प्रथम स्थान हासिल किया. सुनील अपनी पांच गायों को डेरी मेले में लेकर पहुंचे थे. बाकी चार गायों ने भी एक दिन में 75 लीटर से अधिक दूध देकर दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया. पिछले वर्ष भी सुनील की गाय ने राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित मेले में एक दिन में 80 लीटर से अधिक दूध देकर एशिया का रिकॉर्ड बनाया था. यह गाय कई प्रदेशों में आयोजित पशु मेलों में चैंपियन बन चुकी है. लाखों रुपये के ऑफर मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी गायों को कभी बेचने का मन नहीं बनाया. पशुपालक का कहना है कि इन गायों की मदद से ही प्रदेश और जिले की पहचान दूर-दूर तक बनी है.
पशुपालक सुनील ने बताया, करनाल के झंझाड़ी गांव में शैंकी और सिल्लू के नाम से हमारा डेरी फार्म है. 2016 से दो भाई पशुपालन का काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 2017 से वे लगातार मेलों में अपने पशुओं को लेकर आ रहे हैं. पहले भी जब पशु मेला लगता था, वे अपने पशुओं को लेकर मेले में जरूर आते थे. पशुपालक सुनील ने बताया कि पिछली बार भी उनकी गाय ने एशिया में रिकॉर्ड बनाया था. इस बार भी उनकी गाय ने 1 दिन में 78 लीटर दूध दिया है. उन्होंने कहा, इस बार पशु मेले में वो अपनी पांच गायों को लेकर पहुंचे थे. उनकी एक गाय ने 78 लीटर दूध एक दिन में दिया है और पहला स्थान हासिल किया है.
सुनील ने बताया कि वे अपनी गायों को खुराक में सलाद, हरा चारा, फीड और तोड़ी देते हैं. डेरी फार्म से उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है. उन्होंने कहा कि किसान की फसल जैसे एक साल में दो बार आती है, वैसे ही हर महीने पशुओं से इनकम हो जाती है जिससे उनके घर का खर्च और पशुओं का खर्च अच्छे तरीके से चलता है. उन्होंने बताया, पशुपालन किसानों के लिए एक लाभदायक काम है जिससे वे अच्छी कमाई हासिल कर सकते हैं. उनके डेरी फार्म पर भी 200 पशु हैं.
सुनील पशुपालक ने कहा, बीते दिनों में पंजाब के पशु मेले में उनकी गाय ने प्रथम स्थान हासिल किया था. पिछले कुछ महीनो में वे 6 मेलों में हिस्सा ले चुके हैं जिनमें से उनकी गाय एक बार दूसरे स्थान पर आई है जबकि पांच बार प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है. इस बार भी करनाल के राष्ट्रीय डेरी मेले में वे अपनी पांच गायों को लेकर पहुंचे थे. एक गाय ने 78 लीटर दूध दिया, बाकी चार गाय ने 75 लीटर से अधिक दूध दिया.
पशुओं के रखरखाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी में पशुओं की अच्छे तरीके से देखभाल करनी पड़ती है. उन्हें थोड़ी-थोड़ी देर बाद नहलाना पड़ता है और उनके आसपास पंखे और कूलर लगाए जाते हैं ताकि उन्हें गर्मी न लगे. कई बार उनकी गाय के लाखों में दाम लग चुके हैं फिर भी उन्होंने कभी बेचने के बारे में नहीं सोचा क्योंकि इन गायों से ही उन्हें लोग करनाल, हरियाणा और कई प्रदेशों में जानते हैं. यानी उनकी गायों की वजह से ही उनकी पहचान बनी है.