Water for Animal: गर्मियों में गाय-भैंस को इन 8 तरीकों से पिलाएं पानी, नहीं होंगी बीमार 

Water for Animal: गर्मियों में गाय-भैंस को इन 8 तरीकों से पिलाएं पानी, नहीं होंगी बीमार 

Water for Animal केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय पशु-पक्षि‍यों के लिए पीने के पानी से जुड़ी एडवाइजरी जारी करता रहता है. एडवाइजरी के तहत पशुओं को पानी पिलाने से जुड़े कुछ टिप्स सोशल मीडिया पर जारी किए हैं. मंत्रालय का दावा है कि अगर दिए गए टिप्स के मुताबिक पशुओं के लिए पीने के पानी का इंतजाम किया जाता है तो पशु हेल्दी बने रहेंगे और बीमारी उनके आसपास भी नहीं फटकेगी. 

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ज्यादा और अच्छे दूध उत्पादन के लिए साफ और स्वच्छ पीने के पानी का होना बहुत जरूरी है. सिर्फ साफ और स्वच्छ ही नहीं उसे पिलाने का तरीका भी एक्सपर्ट के मुताबिक साफ-सफाई वाला होना चाहिए. इसका फायदा सिर्फ दूध उत्पादन में ही नहीं मिलता है, बल्कि गाय-भैंस की तंदरुस्ती और उसे बीमारियों से दूर रखने के लिए भी बहुत जरूरी है. पशुपालन हो या पोल्ट्री पालन, दोनों ही जगह पीने के पानी का बड़ा ही महत्व है. आपको सुनकर अटपटा लगेगा कि पशु उत्पादन का उत्पादन घटने और बढ़ने में पीने का पानी भी एक बड़ा कारण हैं. 

पीने का पानी अगर साफ नहीं है तो पशु को बीमार पड़ने और उत्पादन घटने में देर नहीं लगेगी. ऐसा नहीं होना चाहिए कि पशु है तो जहां चाह वहां उसे नहर, पोखर का पानी पिला दिया. पशु को भी हेल्दी रखने और उनसे उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि खाने के साथ-साथ पीने के पानी का भी ख्याल रखा जाए. पीने के पानी के बर्तन को साफ रखा जाए. ताजा पानी ही पशुओं को पिलाया जाए. 

पशुओं को पानी पिलाने के ये हैं 8 टिप्स 

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पशुओं को पीने के पानी से जुड़ी टिप्स देते हुए कहा है कि हर संभव कोशि‍श की जाए कि पशुओं को ताजा पानी ही पीने के लिए दें. जैसे सुबह उस बर्तन या जगह से पानी को खाली कर दें जहां पशु पानी पीता है. पानी खाली करने के बाद उस बर्तन और जगह की अच्छी तरह से सफाई कर दें. अगर पानी की उस जगह पर अल्गी और गंदगी लगी है तो उसे अच्छी तरह से साफ कर दें. जब ये लगे कि सफाई अच्छी तरह से हो गई है तो उसमे ताजा पानी भर दें. अगर सर्दियों का मौसम है तो एकदम ठंडा यानि खुले में रखा रात का पानी बिल्कुल भी न पिलाएं. नलकूप का निकला ताजा पानी ही पशुओं को पिलाएं. 

पानी की कमी की ऐसे करें पहचान

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है.

और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. अगर साफ-सफाई के साथ पानी पिलाया जा रहा है, पानी में मौजूद टीडीएस को कंट्रोल किया जा रहा है तो पशु-पक्षि‍यों के बीमार पड़ने का खतरा कम हो जाता है. 

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