80 हजार पशुओं में किया सफल कृत्रिम गर्भाधान, गुजरात में एक्‍सपर्ट ने बदली डेयरी किसानों की तकदीर

80 हजार पशुओं में किया सफल कृत्रिम गर्भाधान, गुजरात में एक्‍सपर्ट ने बदली डेयरी किसानों की तकदीर

गुजरात के महुवा क्षेत्र में एक विशेषज्ञ के प्रयासों ने डेयरी किसानों की तस्वीर बदल दी है. करीब 80 हजार पशुओं में सफल कृत्रिम गर्भाधान कर उन्होंने पशुओं की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है. आखिर कैसे वैज्ञानिक तकनीक से किसानों की आमदनी बढ़ रही है, जानिए पूरी खबर में...

Artificial Insemination Gujarat Expert DeepakArtificial Insemination Gujarat Expert Deepak
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 12, 2026,
  • Updated Mar 12, 2026, 8:34 PM IST

गुजरात के महुवा क्षेत्र में डेयरी क्षेत्र की प्रगति के पीछे वैज्ञानिक पशु प्रजनन तकनीक का बड़ा योगदान सामने आ रहा है. यहां के वैहेवल गांव के 63 वर्षीय कृत्रिम गर्भाधान विशेषज्ञ दीपक पटेल पिछले कई वर्षों से डेयरी किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पशुओं के प्रजनन को बढ़ावा देकर न केवल पशुओं की नस्ल सुधार में योगदान दिया है, बल्कि क्षेत्र के डेयरी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद की है.

1999 में शुरू किया था कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में काम

दीपक पटेल ने वर्ष 1999 में दिल्ली छोड़ने के बाद कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में काम शुरू किया. शुरुआती दौर में उन्हें बताया गया कि अगर इस तकनीक का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो पशुधन की उत्पादकता में तेजी से सुधार हो सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया और धीरे-धीरे डेयरी किसानों के बीच भरोसेमंद विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाई.

80 प्रतिशत तक सफल रहे कृत्रिम गर्भाधान

करीब ढाई दशक के अपने अनुभव में दीपक पटेल अब तक 80 हजार से अधिक कृत्रिम गर्भाधान कर चुके हैं. खास बात यह है कि उनके काम की सफलता दर लगभग 80 प्रतिशत बताई जाती है, जो पशुपालन क्षेत्र में काफी अच्छी मानी जाती है. इससे क्षेत्र में पशुओं की नस्ल सुधारने के साथ दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है.

उत्‍पादन और आय में होता है सुधार

कृत्रिम गर्भाधान तकनीक आधुनिक डेयरी प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. इस तकनीक के माध्यम से किसान बिना महंगे प्रजनन बैलों को पालने के भी बेहतर नस्ल के पशु तैयार कर सकते हैं. इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी सुधार होता है. खासकर उन क्षेत्रों में, जहां बड़ी संख्या में परिवार डेयरी पर निर्भर हैं, वहां यह तकनीक आजीविका को स्थिर बनाने में मदद करती है.

सूरत जिला दुग्ध उत्पादक संघ के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. पी.आर. पांडेय ने भी दीपक पटेल के काम की सराहना की है. उन्‍होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रजनन तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए कई लोगों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें दीपक पटेल जैसे कार्यकर्ता भी शामिल हैं.

उन्‍होंने कहा कि पशुधन की गुणवत्ता सुधारने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाना समय की जरूरत है. अगर ग्रामीण स्तर पर कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकों का दायरा बढ़ाया जाए तो देश के डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में भी स्थायी सुधार किया जा सकता है. (एएनआई)

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